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फर्श से अर्श तक पहुंचा ऋषिकेश का अंकुर प्रजापति।


फुटपाथ पर मेहंदी लगाने वाला, सैकड़ों को दे रहा रोजगार।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन पर मुफ्त में लगती है मेहंदी।

आशीष लखेड़ा/उत्तराखण्ड लाइव: उत्तराखण्ड लाइव एक बार फिर युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित करने वाली रोचक तथ्यात्मक कहानी व उदाहरण आप के लिए लाया है।
बात है तीर्थनगरी ऋषिकेश निवासी अंकुर प्रजापति कि जो कभी फुटपाथ पर लोगों को महंदी लगवाने के लिए मिन्नतें किया करता था। आज कैसे वह क्षेत्र के सैकड़ों युवाओं को उन्हीं के घर में रोजगार देने का काम कर रहा है

यदि आप कभी ऋषिकेश के त्रिवेणीघाट घूमने आए तो लौटते वक्त आपको अंकुर मेहंदी आर्ट एवं टैटू स्टूडियो नजर आएगा। भीतर पहुंचने पर अंकुर प्रजापति आपको ऐसी रूम में आरमदायक कुर्सी पर बैठे स्टॉफ को निर्देश देते दिखेंगे। आज वे महीने के 50 से 60 हजार रूपए कमाते हैं और उनकी दो से तीन दुकाने अलग—अलग शहर में मौजूद हैं। लेकिन आज जो आप देखेंगे उससे पहले का नजारा ठीक इसके विपरीत हुआ करता था। वर्ष 2011 में मात्र 15 वर्ष की आयु में घर के बड़े बेटे अंकुर प्रजापति ने घर खर्च चलाने के लिए तीज त्यौहारों में हाथों में मेहंदी की कीप पकड़ लोगों से मेंहदी लगवाने के लिए मिन्नतें की। बड़े कारीगरों से छूटे जो कुछ लोग अंकुर से महेंदी लगवाते तो अंकुर के दिन के 100 से 300 रूपए तक बन जाया करते। लेकिन अंकुर की लगन और मेहनत ने उसे फर्श से अर्श पर बैठा आज के नौजवानों के लिए उदाहरण बना दिया। उनके पिता ऋषिराम प्रजापति व माता मीना देवी प्रजापति उनकी मेहनत और कामियाबी देख बेहद खुश हो जाती हैं। अंकुर प्रजापति अपने तीन भाई और एक बहन के साथ रहते हैं।

पढ़ाई छोड़ हुनर को ही बनाया रोजगार का हथियार:  कक्षा 6 से ही अंकुर घर का खर्च चलाने के लिए कपड़ों की दुकानों में सेल्स बॉय का काम करने लगे। स्कूल में पढ़ते हुए उनके अध्यापक उनकी कला की खूब प्रशंसा किया करते। शैकिया तौर पर अंकुर ने बड़ों की देखा—देखी मेंहदी लगाना शुरू किया। पहले घर में मॉ व बहनों के हाथों में फिर बाजार में मेहंदी लगाने वालों के साथ मुफ्त में हाथ बटाने लगे। धीरे—धीरे शौक जब परवान चढ़ने लगा तो पढ़ाई 12वीं तक बीच में ही छोड़ अंकुर बतौर मेंहदी आर्टिस्ट काम करने लगे।

वर्ष 2016 में अपना काम शुरू किया : वर्ष 2016 में अंकुर ने त्रिवेणीघाट पर रोड पर किनारे बैठ अपना काम शुरू कर दिया। तीज त्यौहारों में लोग अंकुर से मेहंदी लगवाने लगे और धीरे—धीरे काम जमा और कई विदेशी पर्यटकों को भी अंकुर ने मेंहदी लगाई। काम अच्छा था तो अंकुर मेंहदी आर्ट्स का नाम भी चलने लगा। आस—पास क्षेत्र की अधिकतर शादियों में मेंहदी के लिए बुकिंग मिलनी शुरू हो गई।

वर्ष 2018 में शुरू की मेहंदी की क्लास: अब धीरे—धीरे अंकुर के पास मेहंदी सिखाने को लेकर भी डिमांड बढ़ने लगी। अंकुर ने क्लास देनी शुरू की और देखते ही देखते वह अब तक 1 हजार से अधिक लड़के व लड़कियों को वे मेहंदी लगाना सिखा चुके हैं। आज भी उनके पास सैकड़ों की संख्या में लड़कियां मेहंदी सीखने आती हैं।

2019 में तैयार हुआ अंकुर मेहंदी आर्ट्स व टैटू: वर्ष 2019 में अंकुर ने उसी घाट रोड पर एक दुकान किराए पर ली और मेहंदी के अलावा टैटू का भी काम शुरू किया। अंकुर ने दिल्ली से बकायदा टैटू का प्रशिक्षण भी लिया और आधुनिक मशीनें भी रखी हैं। दुकान पर 4 स्टॉफ मेहंदी व 2 स्टॉफ टैटू के लिए रखे हैं।

अंकुर मेहंदी आर्ट्स युवाओं को दे रहा रोजगार: अंकुर ने न सिर्फ खुद कामियामी पाई बल्कि आज वह क्षेत्र के सैकड़ों युवाओं को रोजगार भी दे रहे हैं। उनके साथ क्षेत्र के 30 से 40 युवा लड़के व लड़कियां जुड़ी हैं जिन्हें शादियों के सीजन में रोजाना काम मिलता है। वहीं उनके साथ काम कर युवाओं को भी उन्ही   के क्षेत्र में काम मिल रहा है।

राजनीतिक,सैलेब्रिटी व पुलिस प्रशासन के बीच फेमस हैं अंकुर: अपनी कला के बूते अंकुर प्रजापति आज ऋषिकेश के भीतर किसी ब्रैंड से कम नहीं। उन्होंने भारत के बहुचर्चित गायिका नेहा कक्कड़,उत्तराखंड पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार, ऋषिकेश नगर निगम की मेयर अनीता ममगांई, काबीना मंत्री सुबोध उनियाल की हूबहू तस्वीर मेहंदी से कागज पर उकेर उन्हें फ्रेम करवा उपहार स्वरूप भेंट किया।

प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन पर मुफ्त मेहंदी लगाते हैं: पिछले 7 वर्षों से प्रधानमंत्री नरेन्द्र  मोदी के जन्मदिन पर अंकुर मुफ्त में मेहंदी लगाते आ रहे हैं। जिसके चलते इस दिन उनके पास सैकड़ों की संख्या में क्लाइंट आते हैं और वह मेहंदी लगाते हैं। इसके अलवा निर्धन व जरूरतमंदी बेटियों की शादियों में भी अंकुर मेहंदी मुफ्त लगाते हैं।

अपनी कामियाबी को मानते हैं मॉ धारी देवी की कृपा: यूं तो अंकुर प्रजापति मूलत: यूपी के रहने वाले हैं लेकिन मॉ धारी देवी से उनका खास लगाव है, वे खुद को उनका उपासक मानते हैं। अंकुर बताते हैं कि वे वर्ष 2015 में मित्रों के साथ एक बार मॉ के दर पर पहुंचे थे और तभी से ऐसी कृपा हुई कि उन्होंने हर मुकाम हांसिल किया। आज उनका पूरा परिवार मॉ धारी देवी की विधिवत पूजा पाठ किया करता है।

  • अंकुर अब तक 6 हजार से अधिक दुल्हनों के हाथों में मेंहदी लगा चुके हैं।
  • 1500 से अधिक विदेशी पर्यटकों के हाथों में अंकुर ने ही मेहंदी लगाई है।
  • 3000 लोग अंकुर मेहंदी आर्ट्स व टैटू स्टूडियो से मेहंदी लगवा चुके हैं।
  • घाट पर रोड पर अब तक 10 से 12 हजार महिलाएं व युवतियो के हाथें में लगा चुके मेहंदी।

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