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पुस्तकें गुरुओं की भी गुरु होती हैं : सांसद तीरथ सिंह रावत


रुद्रप्रयाग : कहते हैं अच्छी किताबें और अच्छे लोग तुरन्त समझ में नहीं आते उन्हें पढ़ना और समझना पड़ता है। कम्प्यूटर और इंटरनेट के प्रति बढ़ती दिलचस्पी के कारण पुस्तकों से लोगों की दूरी बढ़ती जा रही है। लोगों और किताबों के बीच की इस बढ़ती दूरी को पाटने की अनोखी पहल माननीय सांसद तीरथ सिंह रावत के द्वारा हिन्दी साहित्य के प्रचार-प्रसार हेतु पुस्तक वितरण कार्यक्रम के माध्यम से की जा रही है। परियोजना निदेशक, जिला ग्राम्य विकास अभिकरण, रुद्रप्रयाग विमल कुमार द्वारा मुख्य शिक्षा अधिकारी, रुद्रप्रयाग को राष्ट्रभाषा हिन्दी एवं हिन्दी साहित्य के प्रचार-प्रसार हेतु पुस्तक वितरण के लिए कार्यदायी संस्था बनाया गया है।

सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना अंतर्गत राष्ट्रभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार हेतु माननीय सांसद तीरथ सिंह रावत की अनुशंसा पर हिन्दी साहित्य से संबंधित हिन्दी के महान लेखकों की रचनाओं से समृद्ध एक मिनी लाइब्रेरी की पुस्तकों का वितरण व सम्मान समारोह का गणेश एवं उद्घाटन माननीय सांसद द्वारा अटल उत्कृष्ट राजकीय इंटर कॉलेज, रुद्रप्रयाग से हुआ है। माननीय सांसद तीरथ सिंह रावत के सांसद निधि से 60 उ.प्रा.वि.ध्प्रा.वि को 10 हजार, 32 उच्च विद्यालयों को 25 हजार एवं 16 कॉलेज, इंटर कॉलेजों को 50 हजार की पुस्तकों के वितरण एवं पांच साहित्यकारों (1) रमेश पहाड़ी (2)जगदंबा प्रसाद चमोला (3) कृष्णानंद नौटियाल (4)अश्विनी गौड़ (5) कुसुम भट्ट को सम्मानित होने के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। रुद्रप्रयाग जनपद के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ कि जनपद के 108 शैक्षणिक संस्थाओं को एक मिनी लाइब्रेरी की पुस्तकों की प्राप्ति के साथ ही सांसद द्वारा रुद्रप्रयाग जनपद के पांच साहित्यकारों का सम्मान भी हुआ हो।

क्या कहते हैं साहित्यकार…

रमेश पहाड़ी –

रुद्रप्रयाग में गढ़वाल के सांसद प्रखर राजनेता, उत्तराखण्ड राज्य के पहले शिक्षामंत्री और विनम्र जननेता श्री तीरथ सिंह रावत ने राष्ट्र-भाषा हिंदी के उन्नयन के लिए अभिनव कार्यक्रम रखा। कार्यक्रम-स्थल भी आधुनिक रुद्रप्रयाग के निर्माता स्वामी सच्चिदानन्द महाराज द्वारा स्थापित सरस्वती के मंदिर राजकीय इंटरमीडिएट कॉलेज में रखा गया था। यहाँ बड़ी संख्या में शिक्षक व छात्र और हिंदी साहित्य-सेवी उपस्थित थे। सांसद जी ने हिंदी भाषा के उत्थान के लिए किए जा रहे कार्यों का उल्लेख करते हुए आम जन से उसकी भाषा में संवाद स्थापित करने के लिए हिंदी को सबसे बड़ा माध्यम बताया। उन्होंने बताया कि हिंदी की उत्कृष्ट पुस्तकों को आम जन तक पहुँचाने की उन्होंने योजना बनाई है और अनुरोध किया कि इसका लाभ अधिकाधिक लोगों को मिले, इसके लिए विद्यालयों को सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। इस अवसर पर उन्होंने जिले के पाँच साहित्यकारों का सम्मान किया तथा हिंदी की दुर्लभध्कालजयीध्लोकप्रिय पुस्तकों का वितरण भी किया।

कृष्णानंद नौटियाल 

अत्यन्त हर्षित हृदय से उल्लिखित है कि माननीय सांसद गढ़वाल लोकसभा द्वारा जनपद रुद्रप्रयाग के अन्तर्गत अटल उत्कृष्ट राजकीय इंटर कॉलेज, रुद्रप्रयाग में जनपद के साहित्यकारों हेतु सम्मान समारोह का आयोजन किया गया । जनपद रुद्रप्रयाग के इतिहास में किसी राजनेता द्वारा आयोजित इस प्रथम और विशिष्ट प्रकार के आयोजन ने साहित्यकारों की लेखनी को नूतन ऊर्जा और गति प्रदान करने में महत्ती भूमिका का निर्वहन किया है। जिस जनपद ने संस्कृत भाषा के विश्व प्रसिद्ध विद्वान् महाकवि कालिदास को जन्म दिया, ऐसे सीमान्त जनपद के साहित्यकारों को सम्मानित कर माननीय सांसद महोदय ने साहित्य साधकों की लेखनी को गति प्रदान करने का महनीय कार्य किया है। एतदर्थ हम भगवान श्री केदारेश्वर से माननीय सांसद महोदय के उत्तरोत्तर राजनीतिक अभिवृद्धि की मंगलकामना करते हुए लोकप्रिय सरकार के निरन्तर गतिमान रहने की प्रार्थना करते हैं।

कुसुम भट्ट 

जनपद रुद्रप्रयाग के अटल उत्कृष्ट राजकीय इण्टर कालेज रुद्रप्रयाग में को माननीय सांसद पौड़ी गढ़वाल श्री तीरथ सिंह रावत की गरिमामयी उपस्थिति में एक भव्य एवं दिव्य साहित्यिक सम्मान समारोह आयोजित किया गया, जिसमें जनपद के विभिन्न विद्यालयों को छात्रोपयोगी निःशुल्क पुस्तकें तथा प्रशस्तिपत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया, साथ ही साहित्य के क्षेत्र में अपना उल्लेखनीय योगदान हेतु जनपद के पाँच साहित्यकारों को भी सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य राष्ट्रभाषा हिन्दी के मान-सम्मान को बढ़ाकर अपने राष्ट्र प्रेम के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को सिद्ध करना था। माननीय सांसद द्वारा रखा गया यह कार्यक्रम पहली बार आयोजित इस प्रकार का अविस्मरणीय कार्यक्रम रहा।

अश्विनी गौड़ ‘लक्की‘ 

माननीय सांसद जी का आज के समय में पढ़ने-पढ़ाने की संस्कृति की ओर झुकाव वाकई काबिलेतारीफ है, राजनेताओं के द्वारा लेखककृकलमकारों का सम्मान कार्यक्रम साहित्यिक गतिविधियों को नया आयाम देगा। पहली बार यह कार्यक्रम आयोजित किया गया, जहाँ साहित्यकारों के सम्मान समारोह के साथ विद्यालयों को पुस्तकें भी निशुल्क बांटी गई, अवश्य ही ये पहल पठन-लेखन की संस्कृति को बढ़ावा देगी और साहित्य में निष्क्रियता के जाल तोड़कर नया और कुछ बेहतर लिखने को हमें प्रोत्साहित करती रहेगी। सांसद श्री तीरथ सिंह रावत जी द्वारा साहित्य सम्मान कार्यक्रम से भविष्य में और भी राजनेता इस दिशा में कदम बढ़ाएँगे, इस प्रकार के सृजनशील आयोजन करते रहेंगे। आदरणीय सांसद जी को इस कार्यक्रम के लिए बहुत-बहुत बधाईयां धन्यवाद।

जगदम्बा चमोला 

किताब का नाम आते ही जो बिम्ब उभरता है, वो है छपे हुए शब्दों का कागज पर उकेरा समूह, जो हमसे बात करता है, कुछ कहता है। मेरी नजरों में किताब का कोई विकल्प नहीं हो सकता। किताब पढ़ने का जो आनंद है, वो हम स्क्रीन पर, डिजिटल फॉर्म में नहीं सकते। किताब के कागज और स्याही की मिली-जुली सौंधी महक का मजा डिजिटल बुक में नही मिल सकता। किसी शायर ने ठीक ही कहा है: कागज की ये महक ये नशा रूठने को है, ये आखिरी सदी है किताबों से इश्क की । ऐसी स्थिति में माननीय सांसद श्री तीरथ सिंह रावत द्वारा पुस्तक वितरण समारोह का आयोजन अनुकरणीय है। विद्यालयों और पुस्तकालयों को प्रदान की जाने वाली पुस्तकें विद्यार्थियों का ज्ञानवर्धन करने में सहायक सिद्ध होंगी ।

विमल कुमार परियोजना निदेशक-सोशल मीडिया के दौर में पुस्तक वितरण सम्मान समारोह का आयोजन अपने आप में बहुत बड़ा कदम है, क्योंकि किताबें वह साधना हैं जिसके द्वारा हम सभी प्रकार की संस्कृतियों के बीच पुल निर्माण का काम करते हैं।

हेमलता भट्ट शिक्षा अधिकारी-माननीय सांसद जी के प्रयास से रुद्रप्रयाग जनपद के 108 स्कूलों एवं कॉलेजों को हिन्दी साहित्य से संबंधित पुस्तकें ही नहीं प्राप्त नहीं हुई है बल्कि विचारों के युद्ध में पुस्तक रूपी अस्त्र भी प्राप्त हुआ है।

मुकेश कुमार -कार्यक्रम का उद्देश्य राष्ट्रभाषा हिंदी के मान-सम्मान को बढ़ाकर साहित्य साधकों का सम्मान के साथ ही माननीय सांसद श्री तीरथ सिंह रावत के सौजन्य से रुद्रप्रयाग जनपद के 108 शैक्षणिक संस्थाओं को हिंदी के महान कालजीय लेखकों की रचनाओं से समृद्ध एक मिनी लाइब्रेरी की पुस्तकों की प्राप्ति कराना था। जब नहीं मिले कोई जवाब, तब तुम पढ़ो कोई किताब।

सांसद तीरथ सिंह रावत ने जनपद भर के प्रधानाचार्यों, प्रधानाध्यपकों एवं शिक्षकों को संदेश देते हुए कहा कि अपनी भाषा एवं बोली के उत्थान एवं प्रचार के लिए सामूहिक और सतत प्रयास होने जरूरी हैं। हम औपनिवेशिक काल के बाद से अपनी पहचान एवं संस्कृति को अपनाने एवं स्वीकारने में पिछड़ते जा रहे हैं। यह सोच बदलनी होगी, अपनी मूल संस्कृति, भाषा-बोलियों को हमेशा जीवित रखने एवं नई पीढ़ी तक पहुंचाने की जिम्मेदारी हम सब को उठानी होगी।
उन्होंने कार्यक्रम में शामिल अध्यापकों से सीखने की बात स्वीकार करते हुए कहा कि पुस्तकें नहीं हैं तो शिक्षा और शिक्षक का न कोई महत्त्व है और न ही कोई स्थान। पुस्तकों में समाया ज्ञान का भंडार एक अक्षय निधि है। सांसद ने कहा कि विद्यालय से आने वाले छात्र-छात्राओं को एक गुरु ही अच्छे संस्कार देता है, लेकिन पुस्तकें गुरुओं की भी गुरु होती हैं।
वहीं मुख्य शिक्षा अधिकारी श्रीमती हेमलता भट्ट ने बताया कि स्कूलों/कॉलेजों में पुस्तकें देकर माननीय सांसद तीरथ सिंह रावत जी ने ज्ञान की रक्षा के लिए पुस्तकों की जिंदगी बचाने का महान कार्य किया है। कार्यक्रम के संयोजक श्री राजबीर भदोरिया, अटल उत्कृष्ट राजकीय इंटर कॉलेज, रुद्रप्रयाग ने बताया कि स्कूलों/कॉलेजों को भवन मिलने के सैकड़ों उदाहरण होंगे, लेकिन पुस्तकें दिए जाने का रुद्रप्रयाग जनपद में यह पहला अभियान है।

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