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“बृज में आनंद भयो, जय यशोदा लाल की”


श्री कृष्ण जन्मोत्सव पर झूम उठा कथा पण्डाल।

आशीष लखेड़ा/उत्तराखण्ड लाइव:नन्द के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की “, “हाथी घोडा पालकी, जय कन्हैया लाल की”  इन्हीं भजनों के साथ ढालवाला वार्ड 11 में सेमल्टी सदन में चल रही श्रीमद भागवत कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ के चौथे दिन श्री कृष्ण जन्मोत्सव बड़े धूम—धाम से मनाया गया। इस दौरान श्री गणेश डबराल और उर्मिला डबराल की सुपौत्री कुमारी शिवन्या को बाल श्री कृष्ण स्वरूप नंद बाबा टोकरी में लिए झांकी प्रस्तुत की गई। बालकृष्ण की एक झलक पाने को श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। एक—एक कर सभी भक्तों ने श्रीकृष्ण के दर्शन कर पुण्य अर्जित किया।जय कथा प्रसंग सुनाते हुए कथा व्यास राकेश चन्द्र शास्त्री ने कहा कि भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि की घनघोर अंधेरी आधी रात को रोहिणी नक्षत्र में मथुरा के कारागार में वासुदेव की पत्नी देवकी के गर्भ से भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लिया। यह तिथि उसी शुभ घड़ी की याद दिलाती है और सारे देश में बड़ी धूमधाम से मनाई जाती है।

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जिस कोठरी में देवकी-वसुदेव कैद थे, उसमें अचानक प्रकाश हुआ और उनके सामने शंख, चक्र, गदा, पद्म धारण किए चतुर्भुज भगवान प्रकट हुए। दोनों भगवान के चरणों में गिर पड़े। तब भगवान ने उनसे कहा ‘अब मैं पुनः नवजात शिशु का रूप धारण कर लेता हूं। गोकुल मंडल के मुखिया नंद और उनकी पत्नी यशोदा भी उनके कष्ट से बहुत दुखी थे। देवकी और वासुदेव के सातवें पुत्र को वासुदेव की दूसरी पत्नी रोहिणी के गर्भ में स्थानांतरित किया गया।
जैसे ही देवकी ने नन्हे कृष्ण को जन्म दिया, वासुदेव उन्हें एक टोकरी में रख वृंदावन के लिए निकल पडे। वह दिन अलौकिक था, सारे कारागार के पहरेदार सो रहे थे। यमुना नदी में भयंकर तूफान था। ज्यूँ ही वासुदेव यमुना को पार करने लगे, नदी ने उन्हें रास्ता दे दिया। उस तूफान और बारिश के बीच नन्हे कृष्ण की रक्षा के लिए शेषनाग भी पहुँच गए। वह दृश्य अत्यंत अद्भुत था । भगवान् स्वयं पृथ्वी पर आये थे, दुष्टों के दमन के लिए। कहा भगवान् श्री कृष्ण की हर लीला रोमांचक है और इस बात का विश्वास दिलाती है की जब जब दुष्टों ने अपने अत्याचारों से पृथ्वी पर सुख और शांति का विनाश किया है, तब तब ईश्वर पृथ्वी पर अवतरित हुए हैं और उन्होंने दुष्टों का संहार किया है ।जय भगवान् श्री कृष्ण की लीला का व्याख्यान अंतरात्मा में एक परम आनंद की अनुभूति कराता है। श्री कृष्ण की वाणी को भगवद गीता में पिरोया गया ताकि युगों युगों तक ये हमें हमारे कठिन समय में मार्ग दर्शन करे। कथा व्यास राकेश चन्द्र शास्त्री ने कहा कि उनकी रची भगवद गीता, हमेशा से ही मनुष्य का मार्ग दर्शन करती आयीं हैं । गीता में व्यक्त हर बात अनमोल है, अगर मनुष्य इसका पालन करने लगे तो उसका जीवन सार्थक है। आज भी अगर हम खुद को किसी सवाल से घिरा पाएं या हमें ये न समझ आये की क्या सही है और क्या गलत, तो हम भगवद गीता में अपने सवालों के जवाब ढूंढ सकते हैं । इस अवसर पर कथा आयोजक श्री शक्ति प्रसाद सेमल्टी, संजय सेमल्टी, अजय सेमल्टी, विजय सेमल्टी, रमेश चन्द्र, नित्या नंद, वीरेन्द्र दत्त, ललिता प्रसाद, आदित्य नारायण, दिनेश चन्द्र, मिनाक्षी डंगवाल, अनिल सेमल्टी, आशीष सेमल्टी, कांति देवी कपरूवान, नीमा कपरूवान,पूजा डबराल, बबिता, नलिन भट्ट, मयंक, अजय डबराल, मंदीप, आयुशी लखेड़ा, सिद्धी भट्ट, आशीष आदि उपस्थित थे।

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