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घुटनों की बीमारी का आयुष्मान से बेस अस्पताल में हो रहा नि:शुल्क घुटना प्रत्यारोपण


बेस अस्पताल के आर्थो विभाग में घुटना प्रत्यारोपण के सफल ऑपरेशन

अभी तक विभाग सात से अधिक मरीजों का कर चुका है घुटना प्रत्यारोपण

गढ़वाल के मुख्य स्वास्थ्य केन्द्र में उक्त सुविधा मिलने से मरीजों को मिल रही राहत

घुटनों की जांच कराने के लिए कई संख्या में पहुंच रहे मरीज

श्रीनगर। यदि घुटनों की वजह से चलने फिरने या भारी वजन उठाने की दिक्कतें हो रही हो या अन्य तरह की बीमारी हो तो इसके लिए मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के बेस चिकित्सालय में घुटनों की जांच के बाद नि:शुल्क घुटना प्रत्यारोपण हो रहा है। घुटने संबंधी बीमारी होने पर घुटना प्रत्यारोपण बेस चिकित्सालय में आयुष्मान के जरिए नि:शुल्क होने से मरीजों को राहत मिल रही है। ऐसे में अब गंभीर मरीजों को घुटना प्रत्यारोपण के लिए बड़े निजी अस्पताल में नहीं जाना पड़ेगा, ब्लकि गढ़वाल के मुख्य केन्द्र श्रीनगर के बेस चिकित्सालय में आर्थो विभाग में घुटनों का सफल प्रत्यारोपण हो रहा है। यहीं नहीं अभी तक आर्थो विभाग सात लोगों के घुटने प्रत्यारोपण कर चुका है।


बेस अस्पताल में पहाड़ के लोगों को बेहतर से बेहतर चिकित्सा सुविधा मिले इसके लिए प्रदेश के माननीय चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत जी ने अपने अथक प्रयासों से अत्याधुनिक चिकित्सकीय उपकरण से लेकर तमाम व्यवस्थाएं बेहतर की है। जिस कारण आज जटिल से जटिल ऑपरेशन अस्पताल में हो रहे है। आर्थो विभाग के एचओडी डॉ. दयाकृष्ण टम्टा, डॉ आलोक एवं असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. ललित पाठक की यूनिट द्वारा बेस अस्पताल में घुटनों का प्रत्यारोपण किया जा रहा है। जिससे घुटनों की गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों को राहत मिल रही है। गढ़वाल क्षेत्र से पहले लोगों घुटना प्रत्यारोपण संबंधी केस के लिए दून, ऋषिकेश या दिल्ली जाना पड़ता था, किंतु अब मेडिकल कॉलेज श्रीनगर में ही उक्त सुविधा मिलनी शुरु हो गयी है। विभाग के विशेषज्ञों की टीमों ने अभी तक सात लोगों के घुटने प्रत्यारोपण कर दिये है। आर्थो विभाग एचओडी डॉ. दयाकृष्ण टम्टा ने सबसे पहले घुटना प्रत्यारोपण का कार्य किया। डा टम्टा ने बताया कि अभी तक वह छह लोगों के घुटना प्रत्यारोपण कर चुके है। इसी तरह असिस्टेंट प्राफेसर डॉ. ललित पाठक ने दूर-दराज क्षेत्र की एक महिला का घुटना प्रत्यारोपण कर राहत दी है। महिला चलने फिरने में पूरी तरह असमर्थ थी। जांच करने पर पता चला कि उसका बायां घुटना खराब हो गया था और घुटने के जोड़ में जगह बेहद कम हो गई है। घुटनें का कार्टिलेज भी काफी कमजोर हो चुका था। इससे मरीज का घुटना शरीर का भार नहीं सह पा रहा था। सभी जांचो के बाद डॉ. पाठक ने महिला के पैर की सर्जरी कर घुटना प्रत्यारोपण किया। डॉ. पाठक ने बताया कि आर्थो विभाग में घुटना प्रत्यारोपण संबंधी केस शुरु होने के बाद कई लोग घुटने की समस्या लेकर पहुंच रहे है। यदि किसी का घुटना प्रत्यारोपण करना हो तो बेस चिकित्सालय में आयुष्मान के जरिए नि:शुल्क करा दिया जायेगा। घुटना प्रत्यारोपण होने के मात्र एक से डेढ़ हफ्ते के भीतर छुट्टी कर दी जाती है। टीम में डॉ सुखजीत, डॉ अभिषेक निरंजन, डॉ शशांक, डॉ मानसी, डॉ हिमानी, एनेस्थिसिया टीम में डॉ मोहित सैनी, डॉ करुणा, डॉ पल्लवी, फिजियोथिरैपिस्ट अरूण बड़थ्वाल, नर्सिग आफिसर देशराज यादव, ऑपरेशन थियेटर स्टाफ यातम, राहुल, पुनीत जैन, राकेश, सुरेन्द्र, अंजू, बंसी , सौरभ आदि का भी सहयोग रहा।

महिला को घुटने के दर्द से दिलाई निजात
रुद्रप्रयाग जिले के झुंडोली बछच्णस्यूं पट्टी की 57 वर्षीय धोसा देवी के बाये पैर का घुटने में पांच साल से दर्द रहता था। महिला के पति गोपाल सिंह ने बताया कि काफी समय से दर्द की गोली खाकर काम चला रहे थे, बेस चिकित्सालय पहुंचे आर्थो विभाग के डॉ. ललित पाठक द्वारा एक्सरे व अन्य जांचे कराई, जिसके बाद घुटना प्रत्यारोपण किया गया। जिससे उनकी पत्नी का घुटने का दर्द गायब हो गया। उन्होंने अस्पताल में घुटना प्रत्यारोपण नि:शुल्क रूप से कराये जाने की सुविधा देने पर प्रदेश के मुख्यमंत्री जी एवं स्वास्थ्य मंत्री जी के साथ ही अस्पताल के डॉक्टरों का आभार प्रकट किया।

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