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चुनाव ड्यूटी के लिए सरकार को नहीं मिल रहे वाहन।


कम किराया और समय पर भुगतान न होने से है दिक्कत।

देहरादून/उत्तराखंड लाइव: 
चुनाव नजदीक हैं और तैयारियां भी तेज हो रही हैं लेकिन आलम यह है कि सरकार को  चुनाव ड्यूटी के लिए वाहन उपलब्ध नहीं हो पा रहे। गौर तलब है की टैक्सी और मैक्सी वाहन वाले इस बार चुनाव के लिए अपने वाहन देने से कतरा रहे हैं। अधिकतर लोगों ने ड्यूटी से बचने के लिए अपने वाहन घर पर ही खड़े कर दिए। कम किराया और समय पर भुगतान नहीं मिलने से वाहन स्वामी खफा हैं। कोरोना के कारण दो साल से आर्थिक संकट झेल रहे वाहन स्वामियों को चिंता है कि यदि उनका वाहन चुनाव ड्यूटी में लगा तो ड्राइवर और वाहन के खर्चे कैसे उठाएंगे।

परिवहन विभाग ने चुनाव के लिए वाहनों का अधिग्रहण करना शुरू कर दिया है:- विभाग की टीमें सड़कों पर वाहन को रोककर उनके कागजात अपने कब्जे में ले रही हैं। गढ़वाल मंडल में बीस हजार से ज्यादा बस, सिटी बस, टैक्सी और मैक्सी हैं, जिन्हें चुनाव ड्यूटी में लिया जा सकता है। पहले चरण में विभाग टैक्सी और मैक्सियों का अधिग्रहण कर रहा है। ऐसे में कई लोगों ने अपनी टैक्सी-मैक्सी अपने घरों में खड़ी कर रही हैं, जिस कारण परिवहन विभाग को वाहन अधिग्रहण करने में दिक्कत आ रही है।

समय पर भुगतान न होना है कारण।
वाहन स्वामी न केवल कम किराया से खफा हैं, बल्कि समय पर भुगतान नहीं मिलने से भी परेशान हैं। टीजीएमओ के सचिव हिम्मत सिंह रावत का कहना है कि चुनाव का भुगतान समय पर नहीं मिलता है। वाहन स्वामियों को भुगतान के लिए चक्कर काटने पड़ते हैं। ड्राइवर और कंडक्टर भुगतान के लिए मालिक पर दबाव बनाते हैं।

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