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पेपर लीक मामले के मास्टर माइंड हाकम सिंह व उसके साथियों को मिली जमानत…


UKSSSC Paper Leak: उत्तराखण्ड के पेपर लीक मामले में बड़ा अपडेट आ रहा है। बताया जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट से घोटाले के मास्टर माइंड हाकम सिंह को जमानत मिल गई है। इसके साथ ही दो अन्य आरोपियों को भी कोर्ट ने जमानत दे दी है। जिससे युवाओं में आक्रोश भी है। सोशल मीडिया पर हाकम सिंह की जमानत को लेकर कई तरह की बाते की जा रही है। साथ ही धामी सरकार को ट्रोल भी किया जा रहा है।

मीडिया रिपोर्टस के अनुसार पेपर लीक मामले के मास्टर माइंड हाकम सिंह के साथ ही उसके साथी विपिन बिहारी और शशिकांत को भी जमानत मिली है। बताया जा रहा है कि जज ए एस बोपन्ना और प्रशान्त कुमार मिश्रा ने बहस सुनने के बाद तीनों की जमानत मंजूर की है। हाकम सिंह, विपिन बिहारी और शशिकांत तीनों एक साल बाद जेल से बाहर आएंगे। कोर्ट में बहस सुनने के बाद तीनों को जमानत मिली है।

गौरतलब है कि हाकम सिंह पेपर लीक मामले में पिछले एक साल से जेल में बंद है। पिछले साल हाकम सिंह को थाईलैंड से लौटने के बाद उत्तरकाशी जिले से गिरफ्तार किया था। अब तक पेपर लीक मामले में 80 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। दिसंबर 2021 में हुई स्नातक स्तरीय परीक्षा के पेपर लीक होने की शिकायत की जांच एसटीएफ़ कर रही है।

बता दें कि मामले में गिरफ्तार लोगों में राजनेता, पुलिसकर्मी, सचिवालय कर्मचारी, आउटसोर्सिंग कंपनी का कर्मचारी, परीक्षार्थी, कोर्ट कर्मचारी और कोचिंग सेंटर से जुड़े लोग भी शामिल हैं। यह मामला राजनीतिक भी रहा क्योंकि इसमें हाकम सिंह को कथित घोटाले का मास्टरमाइंड कहा गया। हाकम सिंह के कई बड़े नेताओं और अधिकारियों से रिश्ते होने की बात सामने आई थी।

उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) ने विभिन्न विभागों के 916 पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की और दो लाख 16 हज़ार युवाओं को परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड जारी किए गए. इनमें से एक लाख 60 हज़ार अभ्यर्थियों ने 4-5 दिसंबर, 2021 को आयोजित परीक्षा दी। इसके परिणाम 8 अप्रैल, 2022 को जारी कर दिए गए और इसके साथ ही परीक्षा में धांधली की शिकायतें भी आने लगीं.

बेरोज़गारों ने कई जगह प्रदर्शन किए और परीक्षा की न्यायिक जांच की मांग की. उत्तराखंड बेरोज़गार संघ इस मामले में मुख्यमंत्री पुष्कर धामी से भी मिला और उनके निर्देश पर 22 जुलाई को देहरादून के रायपुर थाने में केस दर्ज कर जांच एसटीएफ़ को सौंप दी गई। जिसके बाद मामले में ताबातोड़ गिरफ्तारियां हुई। कई जिसमें जेल पहुंचे तो कुछ जेल से जमानत पर छूट गए।

 

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