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पाप के प्रायश्चित को श्री राम ने लगाई थी यहाँ डुबकी।


ऋषिकेश के त्रिवेणी घाट पर मौजूद है यह कुण्ड।

ब्यूरो/उत्तराखंड लाइव: तीर्थनगरी उत्तराखंड में अनेकों धर्म और सिद्ध  स्थल है। ऋषि कुंड भी इसमें शामिल है, जो त्रिवेणी घाट में गंगा नदी के ही समीप स्थित है। कहा जाता है कि यमुना नदी का पानी त्रेता युग से यहां पर विराजमान है।मान्यता यह भी है कि कुंज ऋषि ने त्रेता युग में यहां कठोर साधना की थी। जिसके बाद यमुना नदी के आशीर्वाद से यह कुंड नदी के जल से भर गया था। मान्यता है कि इस ऋषि कुंड का जल न तो कभी बढ़ता है और न कम होता है। यमुना का जल ऋषि कुंड से ही त्रिवेणी घाट में गंगा में जाकर मिलता है। इस कुंड का पानी हमेशा एक रंग का रहता है। किसी भी मौसम में इसका पानी कभी मटमैला नहीं होता।साथ ही कुंड के पास रघुनाथ जी का मंदिर भी स्थापित है। मान्यता है कि रावण के वध के बाद ब्रह्म हत्या के पाप के प्रायश्चित के लिए भगवान राम ने कुछ समय तक इस कुंड के पास तप किया था। इसके बाद वह तपस्या करने देवप्रयाग चले गए थे। यहां भी राम भक्त दूर-दूर से आकर रघुनाथ जी के दर्शन करते हैं।

क्या ही ऋषिकुण्ड का मतलब:-ऋषिकुंड का अर्थ है ऋषि का तालाब और ऋषिकेश में सबसे महत्वपूर्ण स्थानों में से एक है। ऋषिकेश में त्रिवेणी घाट के पास स्थित एक पवित्र तालाब है। यह माना जाता है कि संत कुंज की सौम्यता से प्रसन्न होकर यमुना नदी की देवी ने इस तालाब को अपने पानी से भर दिया था। पर्यटक तालाब के पानी में भगवान राम और सीता को समर्पित प्राचीन रघुनाथ मंदिर की छवि देख सकते हैं। दो प्रसिद्ध मंदिर, लक्ष्मण मंदिर और भारत मंदिर भी ऋषिकुंड के पास स्थित हैं। दुनिया के विभिन्न हिस्सों से भक्त यहां इकट्ठा होते हैं और देवी यमुना को अपनी प्रार्थना अर्पित करते हैं और अन्य देवताओं का आशीर्वाद भी मांगते हैं।

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