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श्रीराम व श्रीकृष्ण का भी जामुन फल से गहरा सम्बन्ध था : एनके झींगन 


चण्डीगढ़ : जीएमएसएसएस, सेक्टर 23-ए (एनवाईसी) ने पर्यावरण सोसायटी ऑफ इंडिया के सहयोग से जामुन दिवस को उत्साहपूर्वक मनाया। इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों एवं स्टाफ ने सक्रिय भागीदारी दिखाई। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं में स्वदेशी फल जामुन के सांस्कृतिक, पारिस्थितिकीय और पोषण संबंधी महत्व के प्रति जागरूकता फैलाना था।
डॉ. रितु नांगिया, इको क्लब प्रभारी एवं एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी ने सभी उपस्थितजनों को कार्यक्रम के उद्देश्यों से अवगत कराया। डॉ. रविंद्र नाथ, पर्यावरण सोसायटी ऑफ इंडिया के कोषाध्यक्ष एवं चंडीगढ़ प्रशासन की सलाहकार समिति के सदस्य ने संबोधित करते हुए आम जीवन में जामुन वृक्ष के महत्व एवं इसके समग्र लाभों को रेखांकित किया।
राम कुमार शर्मा, सेवानिवृत्त प्रिंसिपल एवं सोसायटी के सक्रिय सदस्य ने करुणा सदन स्थित कार्यालय एवं चंडीगढ़ के विभिन्न स्कूलों में विशेष रूप से जामुन एवं अन्य पौधों (जैसे गुलाब) की नर्सरियों के विकास हेतु अपनी सेवाएं देने का प्रस्ताव रखा।


एनके झींगन, पर्यावरण सोसायटी ऑफ इंडिया के सचिव एवं सचिव (पर्यावरण), भारतीय एकता मंच, चंडीगढ़ ने जामुन फल के पौराणिक एवं पारंपरिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भगवान श्रीराम ने अपने 14 वर्षों के वनवास के दौरान मुख्यतः जामुन फल का सेवन किया था, तथा भगवान श्रीकृष्ण के शरीर का रंग भी गहरे बैंगनी रंग का माना जाता है, जो जामुन के रंग से मेल खाता है। उन्होंने जामुन वृक्ष की लकड़ी, जड़, छाल एवं फल के औषधीय और पारिस्थितिकीय लाभों के बारे में भी विस्तारपूर्वक जानकारी दी।
श्री झींगन ने बताया कि पर्यावरण सोसायटी ऑफ इंडिया विश्व की एकमात्र संस्था है जो 1997 से निरंतर जामुन दिवस मना रही है। पहले यह एक दिन का कार्यक्रम होता था, लेकिन अब इसे एक सप्ताह तक चलने वाले जागरूकता अभियान के रूप में विस्तारित कर दिया गया है, जिसका उद्देश्य जामुन वृक्ष एवं फल के संरक्षण एवं सतत उपयोग को बढ़ावा देना है। उन्होंने आम दिवस, तोता दिवस सहित वर्षभर चलने वाले अन्य नवाचारपूर्ण अभियानों की भी जानकारी साझा की।
इस कार्यक्रम को श्री राजिंदर, चंडीगढ़ वैल्यूएबल्स से जुड़े एक समर्पित सहयोगी का सहयोग प्राप्त हुआ।
कार्यक्रम के समापन पर विद्यार्थियों एवं स्टाफ को जामुन फल वितरित किया गया, ताकि वे इस पोषक फल के प्रति रुचि बढ़ाएं और इसके महत्व का प्रचार करें। विद्यालय परिसर में एक जामुन का पौधा भी रोपा गया, और विद्यार्थियों को सलाह दी गई कि फलों वाले पेड़ों पर पत्थर न फेंकें ताकि किसी प्रकार की क्षति या दुर्घटना से बचा जा सके।
इस अवसर पर अशोक बंसल, परमजीत कौर, राकेश कुमार शर्मा, तथा राजिंदर कुमार (कार्यक्रम के प्रायोजक) सहित विद्यालय के शिक्षकगण एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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