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ज्ञान और सूचना के बीच बढ़ती खाई समाज के सामने बड़ी चुनौती : डॉ. सच्चिदानंद जोशी

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ज्ञान और सूचना के बीच बढ़ती खाई समाज के सामने बड़ी चुनौती : डॉ. सच्चिदानंद जोशी

पंचनद शोध संस्थान के 33वें वार्षिक व्याख्यान में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने नागरिक कर्तव्यों और सांस्कृतिक मूल्यों पर दिया जोर

चण्डीगढ़ : पंचनद शोध संस्थान, चंडीगढ़ की ओर से रविवार को सेक्टर-26 स्थित निट्टर (एनआईटीटीटीआर) में 33वें वार्षिक व्याख्यान का आयोजन किया गया। “हम भारत के लोग – हमारे दायित्व” विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में जम्मू, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और चंडीगढ़ से 350 से अधिक बुद्धिजीवियों ने भाग लिया। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए), नई दिल्ली के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने मुख्य वक्तव्य दिया।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि लोकतंत्र तब और मजबूत होता है, जब नागरिक अपने अधिकारों का उपयोग करने के साथ-साथ अपने कर्तव्यों का भी निर्वहन करते हैं। समाज को सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने के लिए संस्थान के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने संवैधानिक संस्थाओं के प्रति सम्मान, महिलाओं की गरिमा और समाज के सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि असहमति लोकतंत्र का अभिन्न अंग है, लेकिन इससे राष्ट्रीय हित प्रभावित नहीं होना चाहिए।

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भारत की विविधता को देश की ताकत बताते हुए मुख्यमंत्री ने विभिन्न समुदायों के बीच भाईचारे और परस्पर सम्मान की भावना को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने भावी पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के उद्देश्य से जल संरक्षण, मिट्टी के स्वास्थ्य और प्राकृतिक खेती के महत्व को भी रेखांकित किया। मुख्यमंत्री ने अग्निवीरों के कल्याण और लिंगानुपात में सुधार के लिए हरियाणा सरकार की पहलों का भी उल्लेख किया।


उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक का योगदान राष्ट्र के विकास को गति देता है। इस अवसर पर उन्होंने हरियाणा पर केंद्रित शोध कार्यों के लिए पंचनद शोध संस्थान को 11 लाख रुपये की अनुदान राशि देने की घोषणा की।

मुख्य वक्तव्य देते हुए डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि आज समाज ज्ञान और सूचना के बीच बढ़ती खाई की चुनौती से जूझ रहा है। प्रौद्योगिकी ने जहां नए अवसरों के द्वार खोले हैं, वहीं कई गंभीर चुनौतियां भी उत्पन्न की हैं। उन्होंने कहा कि समाज को सही दिशा देने और नागरिक कर्तव्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाने में बौद्धिक समुदाय की महत्वपूर्ण भूमिका है।

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डॉ. जोशी ने कहा कि देशभक्ति भारतीय समाज की गहरी जड़ों में समाहित है। राष्ट्रगान सुनने या तिरंगे को देखने पर लोगों के मन में उत्पन्न होने वाला गर्व इसका प्रमाण है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय प्रगति केवल संवैधानिक संस्थाओं और शासन व्यवस्था पर निर्भर नहीं करती, बल्कि इसके लिए नागरिकों में जागरूकता, सक्रिय भागीदारी और जनहित के प्रति प्रतिबद्धता भी आवश्यक है।

उन्होंने भारत के विविध समुदायों को एकजुट रखने के लिए साझा जिम्मेदारियों, समान लक्ष्यों और सामूहिक पहचान के महत्व पर जोर दिया। उनके अनुसार, अपनेपन की साझा भावना विभिन्न समुदायों को एक साथ लाकर राष्ट्रीय आकांक्षाओं की पूर्ति में सहायक बन सकती है, जबकि विविधताओं का सम्मान भी बना रहता है।

समकालीन सामाजिक चुनौतियों, जिनमें जनसंख्या असंतुलन भी शामिल है, का उल्लेख करते हुए उन्होंने समाज से अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने का आह्वान किया। उन्होंने संस्कृति, सभ्यता, चरित्र, संतोष, चेतना और करुणा जैसे मूल्यों को भी महत्वपूर्ण बताया। संवाद सत्र के दौरान उन्होंने लक्ष्य प्राप्ति के लिए समर्पण के साथ प्रयास कर रहे युवाओं की सराहना की और उनकी ऊर्जा को सकारात्मक बदलाव तथा विकसित भारत 2047 के निर्माण की दिशा में लगाने का आह्वान किया।

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इससे पहले संस्थान के अध्यक्ष प्रो. बृज किशोर कुठियाला ने ‘पंचनद : आज और कल’ विषय पर प्रस्तुति देते हुए संस्थान की संवाद एवं शोध संबंधी गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संस्थान के विभिन्न मंचों के माध्यम से सामाजिक मुद्दों पर चर्चा के लिए 20,000 से अधिक लोगों को एक साथ लाया जा चुका है। उन्होंने पंजाब की ऐतिहासिक एवं समकालीन आर्थिक परिस्थितियों पर शोध करने की आगामी योजनाओं का भी उल्लेख किया।

कार्यक्रम के दौरान संस्थान की शोध पत्रिका, एक मोनोग्राफ और कई पुस्तकों का विमोचन भी किया गया। इनमें ‘द जेनोसाइड ऑफ हिंदूज इन बंगाल’ (बंगाल में हिंदुओं का नरसंहार) नामक पुस्तक भी शामिल थी। कार्यक्रम में निट्टर के निदेशक डॉ. भोला राम गुर्जर सहित क्षेत्र के अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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