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गंगा स्वच्छ्ता की जनजागरूकता को एकजुट हों पर्यटन व्यवसायी।


राफ्ट एवं कैम्प संचालकों की होगी अहम भूमिका।

ब्यूरो/उत्तराखण्ड लाइव: गढ़वाल विश्वविद्यालय श्रीनगर एवं नमामि गंगे प्रकोष्ठ उमंग तथा राज्य परियोजना प्रबंधन ग्रुप नमामि गंगे उत्तराखण्ड के संयुक्त तत्वाधान मेंं कार्यशाला आयोजित की गई। जिसमें गंगा स्वच्छता के लिए पर्यटन व्यवसायी/राफ्टिंग संचालक, पर्यटन छात्र, शोध छात्र,स्वयंसेवी संस्थाओं के सदस्य व प्रकृति छायाकारोंं ने विमर्श कर गंगा स्वच्छता के जन जागरूकता अभियान को प्रभावी बनाने हेतु विभिन्न समस्याओं तथा उसके समाधानों के लिए विमर्श किया। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि यह मात्र किसी सामाजिक संस्था या सरकार का कर्तव्य नहीं बल्कि आम आदमी का सामाजिक दायित्व भी है।शनिवार को ऋषिकेश के गंगा रिसॉर्ट मेंं आयोजित कार्यशाला का शुभारम्भ मुख्य अतिथि उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्याल हरिद्वार के कुलपति प्रोफेसर देवी प्रसाद त्रिपाठी, कार्यशाला कोर्डिनेटर डॉ सर्वेश उनियाल, होटल व्यवसायी, समाज सेवी चन्द्रवीर पोखरियाल व समाज सेवी अशोक शर्मा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

कार्यशाला में वक्ताओं ने जीवन दायिनी मॉ गंगा को उत्तराखण्ड के व्यवसाय व रोजगार की रीढ़ बताया। कहा कि गंगा स्वच्छता कोई अभियान नहीं अपितु प्रत्येक नागरिक का दायित्व होना चाहिए। साथ ही गंगा में स्वच्छता बनाए रखने के लिए समितियों का गठन करने के साथ ही मूलभूत सुविधाएं जुटाने पर भी जोर दिया गया।उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्याल के कुलपति- श्री प्रो देवी प्रसाद त्रिपाठी ने कहा कि – हमारे भारतीय ग्रंथों में नदियों को बड़ा महत्व बताया गया है। कहा कि प्रकृति के विरूद्ध किया जाने वाला हर कार्य पाप की श्रेणी में माना जाता है। गंगा का निर्मल और अविरल बहना ही प्राकृतिक है। इसलिए गंगा को अविरूद्ध करना व गंदा करना पाप है।आज देश की राजनीति व्यवस्था का मूल नास्तिक दर्शन है। गंदगी करने वालों के खिलाफ समाज को एकजुट होना पड़ेगा। कहा कि गंगाजल संसार का सबसे दिव्य जल कहा गया है। हिमालय से निकलने वाली सभी नदियां गंगा का स्वरूप है।

समाजसेवी चन्द्रवीर पोखरियाल  ने कहा कि – मैं पिछले लंबे समय से होटल व्यवसाय से जुड़ा हूं। मैंने देखा है कि  बाहर से टूरिस्ट अलग-अलग राज्यों से आता है वह गंगा के प्रति आस्थावान भी हैं। लेकिन सरकार को इस शहर में एक ट्रैंचिग ग्राउंड बनाना चाहिए। व्यवसायी टैक्स देता है वह कभी नहीं चाहता की गंगा मैली हो। यदि वह गंगा की स्वच्छता के लिए नहीं सोचता तो उसे यहॉ व्यवसाय करने का कोई अधिकार नहीं।

समाज सेवी अशोक शर्मा ने कहा कि – देश विदेश में भी स्वच्छता के लिए लोग एकजुट हो रहे हैं। आने वाली पीढ़ी स्वच्छता को लेकर काफी जागरूक है। आज जो भी व्यवसाय हो रहा है, उसमें सबसे बड़ा योगदान गंगा का ही है। यदि गंगा न हो तो यहॉ किसी भी व्यवसाय का कोई महत्व नहीं। गंगा एक ऐसी धरोहर है जिसे हमें संजो कर रखना है। व्यवसायी पर्यटकों से कमाए लेकिन अपनी संस्कृति को जीवित रखे। जब तक कानून नहीं होगा तब तक गंगा स्वच्छता धरातल पर नहीं होगा। इस दौरान अशोक क्रेजी ने गंगा स्वच्छता के विषय पर कविता पाठ भी किया। आज संकट में है गंगा, हिमालय देता है आवाज। भारत की शान है ंगंगा भारत की पहचान है गंगा।

व्यवसायी देवेन्द्र रावत ने कहा कि – पहले राफ्टिंग का स्वरूप इको फ्रैन्डली होता था। तब व्यवस्थाएं ठीक थी। आज  गंगा बीच की स्थिति बहुत खराब है। गंगा के साथ-साथ जो नाले हैं उन्हें भी सफाई करने की जिम्मेदारी हमारी ही है। अब यह व्यवसाय गांव की ओर बढ़ चला है लेकिन गांव में अभी तक शौचालय सहित अन्य मूलभूत व्यवस्थाओं की कमी है। इसके लिए एक समिति बनाए कर जिम्मेदारियां तय की जाए। नगर पंचायत ग्राम पंचायतों को ध्यान देना होगा। आज गांव में कूड़े का ढेर लगा हुआ नजर आता है।

पीजी कॉलेज नरेन्द्र नगर के प्रो विजय प्रकाश भट्ट ने कहा कि – नदियां मानव सभ्यता के उद्गम का आधार है।  आज कुछ नदियां लुप्त हो गई हैं। कुछ नदियां आज भी हमारे जीवन का अभिन्न अंग है। हर मील पर जब गंगा चलती है तो नया व्यापार व संस्कृति को जन्म देती है।

इसे मॉ कहा जाता है क्योंकि यह लाखों लोगों की आजीविका का साधन है।  हमने देखा कि लॉक डाउन में गंगा कितनी साफ हो गई थी क्योंकि मनुुष्य को हस्ताक्षेप नहीं हुआ। गंगा के बिना मनुष्य का अस्थित्व नहीं। हमें व्यवसाय और गंगा स्वच्छता के बीच सामंजस्य बनाना होगा जिससे व्यापार भी प्रभावित भी न हो और स्वच्छता भी बनी रही।

कार्यशाला का दूसरे सत्र — दूसरे सत्र में प्रतिभागियों एवं विशेषज्ञ के बीच प्रश्नोत्तर एवं ओपन डिसकसन फोरम का आयोजन भी किया गया। जिसमें  पर्यटन उद्यमि दिनेश कठैत ने प्रतिभागियोंं की जिज्ञासा को शांत करते हुए कहा कि गंगा स्वच्छता के लिए यह जरूरी है प्राईमरी स्तर पर इसे शिक्षा में शामिल किया जाए। वहीं लोकल स्तर पर प्रत्येक आदमी को एकजुट होना पड़ेगा। वहीं व्यवसायी राजेश क्षेत्री ने गंगा स्वच्छता के लिए कठोर से कठोर कानून बनाया जाने की पैरवी की। कहा कि स्वच्छता के लिए प्रबंधन का होना जरूरी है। इसके अलावा वॉलेंटिर्यस के तौर पर समय-समय पर लोगों को अभियान से जोड़ना होगा। बस स्टैंड व एयरपोर्ट पर ही पर्यटकों को शहर में प्रवेश के लिए के स्वच्छता गाइड लाइन प्रदर्शित की जानी चाहिए।

इस अवसर पर इको डेवल्पमेंट कमेटी भ्यूडार के अध्यक्ष चन्द्रशेखर सिंह चौहान, पूर्व अध्यक्ष सतीष चौहान, पुष्कर सिंह नेगी, डॉ राहुल बहुगुणा, दिनेश कठौत, कुलदीप वर्मा, विजय प्रकाश प्रजापति, वकार हुसैन, महेश पैन्यूली, डॉ विजय भट्ट, जितेन्द्र ठाकुर, करिश्मा, रोहित, देवेश नेगी, स्वेता, आशीष लखेड़ा, अमन नेगी, अजीत सिंह, अंकित कुमार, शिवानी भण्डारी,सुनील पुण्डीर, दिनेश कोठारी, राजेश खत्री, विनित जैन, दिव्या नेगी, धर्म सिंह रावत, जयवीर रावत, सतीष चौहान, अभिषेक भण्डारी, अजेन्द्र चौहान, अनिल सिंह, मंजीत, पंकज, सुभाष राणा, बिजेन्द्र पंवार, अभिषेक पाल, राहुल बर्थवाल, नागेन्द्र सिंह रावत आदि उपस्थित थे।

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