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हमें आयुर्वेद में शोध के लिए पूरा जीवन देकर इसे जिंदा रखना है : सर कार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले


दत्तात्रेय होसबाले सेक्टर-46 स्थित श्री धन्वंतरि आयुर्वेदिक कालेज एवं अस्पताल में आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए

कालेज परिसर में आयुर्वेदिक के जनक धन्वंतरि की प्रतिमा किया अनावरण

चंडीगढ़ : राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सर कार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि हमें आयुर्वेद में शोध के लिए पूरा जीवन देकर इसे जिंदा रखना है। जिसके जरिये हम विश्व के रोगियों के कष्ट दूर सकते हैं। हमको किसी अन्य पद्धति का विरोध नहीं करना है।दत्तात्रेय होसबाले सेक्टर-46 स्थित श्री धन्वंतरि आयुर्वेदिक कालेज एवं अस्पताल में स्वर्गीय मदन दास देवी जी की याद में आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। इससे पहले उन्होंने कालेज परिसर में आयुर्वेदिक के जनक धन्वंतरि की प्रतिमा का अनावरण और स्वर्गीय मदन दास देवी जी को समर्पित कालेज एवं अस्पताल के द्वितीय तल का उद्घाटन किया।

आयुर्वेद   उन्होंने कहा कि स्वर्गीय मदन दास देवी स्वदेश जागरण मंच के पक्षधर थे। वे ज्ञान, परपंरा, सांस्कृतिक और सभ्यता को अपनाने पर जोर देते थे। मदन जी ने अपने जीवनकाल में लाखों युवाओं को सही रास्ता दिखाया है। जिस पर चलकर वे सफल हुए हैं। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया है कि हम जहां रहें वहां पर बेहतर प्रदशर्न करें और अपनी योग्यता को साबित करते रहें। वाइस चांसलर आयुष विश्वविद्यालय (हरियाणा) करतार धीमान ने कहा कि धन्वंतरि आयुर्वेदिक कालेज एवं अस्पताल उत्तर भारत के श्रेष्ठ कालेजों में से एक है, लेकिन हम सभी को उत्तर भारत ही नहीं बल्कि इसे पूरे भारत वर्ष में सर्वश्रेष्ठ आयुर्वेदिक कालेज बनाना है।

कालेज एवं अस्पताल के द्वितीय तल पर ये होगा

कालेज एवं अस्पताल के द्वितीय तल 7 विभागों से युक्त है, जिनमें आचार्य नागार्जुन कक्ष रसशास्त्र एवं भैषज्य कल्पना, आचार्य भावप्रकाश कक्ष- द्रव्यगुण विज्ञान, श्री नीलकंठ कक्ष – अगदन्त्रक व्यवहार आयुर्वेद एवं विधिवैद्यक, महर्षि कश्यप कक्ष – कौमारभृत्य, आचार्य हारीत कक्ष, प्रसूति तंत्र एवं स्त्री रोग, महर्षि भरद्वाज कक्ष संहिता एवं सिद्धांत, स्वस्थ वृत्त एवं योग, एक पुस्तकालय और एक लड़कों का सामान्य कक्ष शामिल है।

संस्कृत क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले तीन विद्यार्थियों को मिलेगी छात्रवृति

श्री धन्वंतरि आयुर्वेदिक कालेज एवं अस्पताल में संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए स्वर्गीय मदन दास देवी जी के नाम से छात्रवृत्ति की घोषणा की है। यह छात्रवृत्ति संस्कृत के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले कालेज के सर्वश्रेष्ठ तीन छात्रों को प्रदान की जाएगी, जो डीन अकादमिक के मार्गदर्शन में संस्कृत परीक्षा में पहले तीन स्थानों पर रहने वाले छात्रों को 2 लाख 51 हजार, 1 लाख 51 हजार और 51 हजार रुपये की छात्रवृत्ति दी जाएगी।

शोध के लिए कालेज में स्वर्गीय श्री मदन दास देवी चेयर की स्थापित

इस दौरान पर कालेज में स्वर्गीय श्री मदन दास देवी चेयर की स्थापना की गई जिसमें 51 लाख रुपये की राशि निर्धारित की गई है। इस राशि का इस्तेमाल ( वात: स्नायु विकार:) न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर जैसे हेमिप्लेजिया, पैराप्लेजिया, डिस्क विकार (सर्वाइकल ब्रैकियल न्यूराल्जिया, साइटिया न्यूरोपैथी), सेरेब्रल पाल्सी, पार्किंसंस रोग, अल्जाइमर रोग आदि क्षेत्र में शोध के लिए किया जायेगा। इस गतिविधि में निवारक उपाय, दिव्यांगगता को कम करते हुए शीघ्र स्वस्थ होना और उसका प्रबंधन तथा अनुवर्ती कार्रवाई की जाएगी।

श्री धन्वंतरि आयुर्वेदिक कालेज एवं अस्पताल का यह है स्वरूप

श्री धन्वंतरि आयुर्वेदिक महाविद्यालय एवं अस्पताल की शुरुआत वर्ष 1975 में अखिल भारतीय विद्यापीठ, नई दिल्ली द्वारा संचालित आयुर्वेद आचार्य पाठ्यक्रम के साथ हुई थी। श्री धनवंतरी एजुकेशनल सोसाइटी (पंजीकृत) के अथक प्रयासों के कारण पंजाब राज्य आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा प्रणाली संकाय से संबद्धता के साथ 1979 में एक बीएएमएस (छह वर्षीय) पाठ्यक्रम शुरू किया गया था। यह केंद्रीय भारतीय चिकित्सा परिषद द्वारा मान्यता प्राप्त है और श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय से संबद्ध है। यहाँ यूजी (बीएएमएस) के लिए 100 तथा पीजी (एमडी/एमएस) के लिए चार विषयों संहिता सिद्धांत, द्रव्यगुण, रोग निदान तथा प्रसूति-तंत्र और स्त्री रोग में 23 सीटें उपलब्द्ध है। 2500 से अधिक स्नातकों को प्रशिक्षित करने के बाद, यह कॉलेज आयुर्वेद में उत्कृष्टता का प्रतीक बन चुका है।

स्वर्गीय मदन दास देवी जी ने छह दशकों तक संघ के प्रचारक के रूप में कार्य किया

स्वर्गीय मदन दास देवी जी ने छह दशकों तक संघ के प्रचारक के रूप में सेवा की। उन्होंने इस समय के दौरान कई जिम्मेदारियों को संभाला और बेखूबी इसको निभाया। उनका व्यक्तित्व कठोर अनुशासन और जिम्मेदारी की भावना से भरा हुआ था। उन्होंने आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर ले जाने और मान्यता प्रदान करने का संकल्प किया था। उन्हें आयुर्वेद को मानवता के लिए फैलाने में रुचि थी। उनके बारे में जो विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं वह यह कि वे आयुर्वेद तथा आयुर्वेदिक पद्धति के दृढ़ समर्थक थे और चाहते थे कि इस पद्धति का लाभ जन-जन तक पहुंचे। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सर कार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले को शाल उढ़ाकर व स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। इस मौके पर श्री धन्वंतरि आयुर्वेदिक कालेज एवं अस्पताल के प्रबंध समिति के प्रधान एवं सदस्य और अध्यापक, डाक्टर अौर विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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