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नया गांव निवासियों ने पंजाब सरकार के उच्च पदासीन अधिकारियों पर लगाए गंभीर आरोप


अधिकारियों की मिलीभगत से एरिया में फल फूल रहा भू माफिया

चंडीगढ़:-नगर कौंसिल नया गांव निवासियों ने पंजाब सरकार के उच्च पदासीन अधिकारियों की मिलीभगत से एरिया में पंचायती जमीन को भू माफिया के हाथों सौंपे जाने या कब्जाए जाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। इनकी भेदभाव की नीति के चलते नया गांव का विकास ही नही हो पाया है। उन्होंने राज्य के प्रिंसिपल सेक्रेटरी, लोकल बॉडी विभाग के सेक्रेटरी, वेटरनरी विभाग सेक्रेटरी, सीवरेज विभाग सेक्रेटरी, फारेस्ट विभाग सेक्रेटरी सहित वाटर डिपार्टमेंट के सेक्रेटरी पर उन्होंने यह आरोप लगाए हैं।

चंडीगढ़ प्रेस क्लब में पत्रकारों के समक्ष अपनी व्यथा रखते हुए नगर कौंसिल नया गांव निवासी कृष्ण कुमार यादव, धर्म सिंह, ओमपाल राणा, रछपाल सिंह, कुलतार राणा, जोगिंदर सिंह सहित एडवोकेट जी एस बल ने बताया कि नया गांव में जो सीवरेज प्लांट 28 करोड़ में लगाया जाना था, वो प्रशासनिक अधिकारियों की नाकामियों की वजह से अब 100 करोड़ तक पहुंच गया है। नगर कौंसिल नया गांव निवासी राज्य के सभी उच्च पदासीन अधिकारियों से समय समय पर गुहार लगा चुके हैं, लेकिन उनकी पीड़ा किसी ने न समझी और न ही उसका निवारण किया। कृष्ण कुमार ने बताया कि उन्होंने एरिया में सीवरेज पाइपलाइन बिछाने का कार्य मात्र 14 लाख में करवाया था, जोकि 5 करोड़ का जॉब था। उनके इस कार्य का हाई कोर्ट ने सू मोटो लिया और अधिकारियों को नोटिस किया। अधिकारियों ने जवाब दायर किया कि सीवरेज का कार्य मास्टर प्लान के तहत होना है, इस लिए समय लग रहा है। 2014 में एक बार फिर अधिकारियों ने एकबार फिर वहीं रटी रटाई स्टेटमेंट दाखिल की, तो उसे रिजेक्ट कर दिया गया। वहीं इसी को लेकर वर्ष 2016 में एक पी आई एल भी दाखिल की गई थी कि गांव में सीवरेज प्लांट लगाए जाने को लेकर अधिकारी सुचेत नही है। जिसका संज्ञान लेते हुए माननीय अदालत ने पंजाब सरकार के अधिकारियों को फटकार लगाई, जिसको देखते हुए इन अधिकारियों ने एक एफिडेविट दाखिल किया कि एक सप्ताह के भीतर एरिया में सीवरेज प्लांट लगाने का कार्य शुरू कर देंगे। जब काफी समय बीत जाने के बाद भी कार्य शुरू नही हुआ तो उन्होंने फिर माननीय अदालत के पास गुहार लगाई। इसी दौरान नरिंदर सिंह काहलों नामक व्यक्ति ने सीवरेज पाइपलाइन बिछाए जाने को जमीन दिए जाने की बात कही, जोकि हकीकत में उसकी है ही नही। उसने इस सीवरेज कार्य के लिए 129/1 जमीन दिए जाने का आश्वासन दिया, जबकि उसने जमीन 129/2 दी। यह सारी जमीन पंचायती है, जोकि इन उच्च पदासीन अधिकारियों की मिलीभगत से भू माफिया के कब्जे में है। कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि नरिंदर सिंह काहलों जिस जमीन को देने की बात कर रहा है, वो जमीन तो चंडीगढ़ एरिया में पड़ रही है। गांव वासियों ने बताया कि उनके माननीय अदालत का दरवाजा खटखटाये जाने पर एक बार फिर इन अधिकारियों ने जवाब दिया कि नया गांव से थोड़ी दूर अन्य गांव पड़छ में सीवरेज प्लांट लगा देंगे। जिसका गांववासियों ने विरोध किया कि एक तो यह गांव पड़छ नया गांव 3 किलोमीटर दूर और इसकी ऊंचाई भी 50 फ़ीट से ज्यादा है, जोकि उचित नही है। इस पर माननीय कार्यवाहक चीफ जस्टिस जी एस संधेवालिया ने राज्य के इन सभी उच्च पदासीन अधिकारियों और नरिन्द्र सिंह काहलों को फटकार लगाई और तुरंत इस पर कार्य शुरू किए जाने के आदेश दिये। इन अधिकारियों की तरफ से बहुत नामी गिरामी वकील पैरवी करने पहुंच गए। उन्होंने सीवरेज कार्य को शुरू को उचित रूप से शुरू किए जाने के लिए 3 महीने का अतिरिक्त समय मांगा, जिसे माननीय कार्यवाहक चीफ जस्टिस जी एस संधेवालिया ने ठुकराते हुए इसे तुरंत से तुरंत शुरू किए जाने के आदेश दिए।
कृष्ण यादव ने बताया कि 17 जुलाई 2011 में नगर कौंसिल नया गांव में नाडा पुल के पास सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का नींव पत्थर स्वर्गीय मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल द्वारा रखा गया। इस समय इसे लगाने की कीमत 28 करोड़ रखी गई थी।दूसरी बार कुमाऊं कॉलोनी में मास्टर प्लान के तहत 27 सितंबर 2012 में प्रिंसिपल सेकेट्री सुरेश कुमार के जरिए विशेष सचिव वी के भल्ला ने एफिडेविट दाखिल किया कि सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट 43 करोड़ की लागत से कुमाऊं कॉलोनी में लगाया जाएगा।

तीसरी बार 2016 में पटियाला की राव नदी के पार लगाने की लागत 73 करोड को गई। चौथी बार 21/02/2024 में नगर कौंसिल नया गाँव से तीन किलोमीटर दूर अलग जगह गांव पडछ मे लगाया जाएगा, जिसकी लागत 100 करोड बताई गई। फरवरी 2007 में हाई कोर्ट के जस्टिस विनय मित्तल द्वारा आर्डर दिया गया कि कोर्ट फाइनेंसियल कमीशन के इंतकाल की म्युटेशन के लिए इसे चैलेंज किया गया। लेकिन 2015 में ई ओ सरबजीत द्वारा फाइनेंसियल किया गया। 2016 में नरिंदर सिंह काहलों और मुख्तयार सिंह द्वारा 129/1 में कमेटी को ट्यूबवेल लगाने के लिए जगह दान दी गई। इसको लेकर कृष्ण यादव द्वारा आर टी आई के तहत जानकारी मांगी गई की नरिंदर सिंह काहलों किस अधिकार के तहत यह जमीन दान दे सकता है। जोकि वो जानकारी आज तक उन्हें नही दी गई। वही वाटर सप्लाई द्वारा दो कदम आगे जाकर चंडीगढ़ की जगह पर लगा दिया गया, जोकि कैपिटल प्रोजेक्ट की जमीन है। इस से साफ जाहिर है कि प्रशासन और भू माफिया आपस में मिले हुए हैं।
कृष्ण यादव व अन्य ने कहा कि उनकी मांग है सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट वहीं लगाया जाए, यहां पर उसकी जगह निश्चित की गई थी। प्रशासनिक अधिकारियों और भू माफिया की मिलीभगत से इसे लगाने में हो रही देरी से जो लागत में इजाफा हुआ है, उसे प्रशासनिक अधिकारियों से पूरा किया जाए और भू माफिया के कब्जे में सरकारी जमीन को खाली करवाया जाए।

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