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वानरराज सुग्रीव ने सीता जी की खोज और रावण-विजय में सहयोग का वचन दिया प्रभु को


चण्डीगढ़ : श्री बद्रीश रामलीला कला निकेतन, सेक्टर 30-ए द्वारा आयोजित रामलीला मंचन में श्रीराम–सुग्रीव मैत्री प्रसंग का प्रभावशाली चित्रण किया गया। प्रसंग में दर्शाया गया कि माता सीता की खोज में श्रीराम और लक्ष्मण की मुलाकात वानरराज सुग्रीव एवं हनुमानजी से होती है। हनुमानजी के परिचय से श्रीराम और सुग्रीव के बीच मैत्री स्थापित होती है तथा सुग्रीव सीता जी की खोज और रावण-विजय में सहयोग का वचन देते हैं।

कलाकारों के सशक्त अभिनय, आकर्षक परिधान और संवाद अदायगी ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। मंच पर सजाए गए वन और जलप्रपात के दृश्य ने वातावरण को और भी वास्तविक बना दिया।

मंचन के साथ-साथ बच्चों के लिए प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। प्रतिदिन पाँचवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों से मंच सचिव रणबीर बिस्ट द्वारा मंचित प्रसंग से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं और सही उत्तर देने वालों को पुरस्कार दिए जाते हैं। आज का प्रश्न था कि माता शबरी ने श्रीराम और लक्ष्मण को महाराज सुग्रीव से मिलने के लिए किस सरोवर से होकर जाने का मार्ग बताया? सही उत्तर रहा पम्पापुर सरोवर।

कार्यक्रम का समापन दर्शकों की उत्साही तालियों और कलाकारों की सराहना के साथ हुआ।

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