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आईआईटी रुड़की में स्थापित होगा राष्ट्रीय शिल्प संसाधन केंद्र ‘संचय’


उत्तराखण्ड लाइव | रुड़की।
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की ने भारत की समृद्ध शिल्प विरासत को संरक्षित करने और उसे आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की घोषणा की है। संस्थान ने वस्त्र मंत्रालय, सरकार भारत के सहयोग से ‘संचय’ नाम से एक राष्ट्रीय शिल्प आधारित संसाधन केंद्र की स्थापना स्वीकृत की है। यह कदम भारतीय शिल्प परंपरा को संरक्षण, डिज़ाइन एवं वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करने की क्षमता को मजबूत करेगा।

संचय’ (Safeguarding, Accumulating, Nurturing Craft and Heritage to stimulate Aatmanirbharta and Yogyata) को नेशनल हैंडीक्राफ्ट्स डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत विकसित किया जाएगा। इस केंद्र का लक्ष्य परंपरागत और लुप्तप्राय शिल्पों को नई तकनीक, डिज़ाइन इनोवेशन और प्रशिक्षण के ज़रिये पुनर्जीवित करना है। इससे शिल्पकारों को कौशल उन्नयन, मार्केट एक्सेस, डिज़ाइन सहयोग और वैश्विक पहचान के अवसर मिलेंगे।

केंद्र में डिज़ाइन स्टूडियो, तकनीक-सक्षम वर्कस्पेस, मेकर लैब, डिजिटल आर्काइव और विस्तृत शिल्प संसाधन संग्रह तैयार होंगे। इसका उद्देश्य न केवल शिल्पकला का संरक्षण और दस्तावेज़ीकरण करना है, बल्कि शिल्प समुदायों को आधुनिक बाज़ार व डिज़ाइन प्रथाओं से जोड़ना भी है। ‘संचय’ के माध्यम से शिल्पकारों के लिए ओएनडीसी और मेक इन इंडिया जैसे प्लेटफॉर्म्स पर व्यापक प्रदर्शनी और विपणन के अवसर भी तैयार किए जाएंगे।

आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रोफ. के. के. पंत ने बताया कि यह केंद्र भारतीय शिल्पों की विविधता को तकनीकी और डिज़ाइन-आधारित नवाचार के साथ जोड़ते हुए अनुसंधान, उद्यमिता और सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था को सशक्त करेगा। इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शिल्प संरक्षण तथा समुदाय सशक्तिकरण का प्रमुख मंच बनाया जाएगा।

यह पहल भारतीय शिल्पों को सिर्फ संरक्षण तक सीमित नहीं रखेगी, बल्कि शिल्पकारों को नई तकनीक, डिज़ाइन सोच और वैश्विक बाज़ार में प्रतिस्पर्धा के लिये तैयार करेगी। इससे परंपरागत कारीगरी और स्थानीय समुदायों को स्थायी आजीविका और पहचान मिलेगी, जो समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने में सहायक होगी।

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