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हर किसी पर आंख मूंद कर यकीं मत कीजिए, अपने दांत भी काट देते है कभी-कभी…


चण्डीगढ़ : संवाद साहित्य मंच ने अमेरिका के शिकागो से पधारे सुदर्शन गर्ग के सम्मान में महर्षि दयानन्द पब्लिक स्कूल, एमडीएवी भवन, दरिया, चंडीगढ़ के श्रीमती सकिंदरा देवी मेमोरियल मल्टी मीडिया हॉल में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। एनआरआई सुदर्शन गर्ग विगत कई वर्षों से ग्रामीण क्षेत्र के महर्षि दयानन्द पब्लिक स्कूल, दरिया के विकास में योगदान दे रहे हैं। उनकी सामाजिक सेवाओं को देखते हुए संवाद साहित्य मंच और विद्या धाम ने उन्हें  प्रशस्ति पत्र, मेडल और अंग वस्त्र से सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन कवयित्री नीरू मित्तल ने किया। प्रसिद्ध साहित्यकार प्रेम विज ने नज्म पेश करते हुए कहा- हर किसी पर आंख मूंद कर यकीं मत कीजिए/ अपने दांत भी काट देते है कभी-कभी। नीरू मित्तल ने कहा – पायल सासों कि बज जाए, तन मन अंगड़ाई है छाए, फागुन का रंग है चढ़ा, ओ रसिया आजा न रंग बरसा।  डॉ. सरिता मेहता ने कहा- मजबूत इरादे हैं जिसके, वह सदा यूं ही महकता है। उठो । सी तरह तुम भी महको, पंछी की तरह तुम भी चहको। विमला गुगलानी ने प्रवास पर बोलते हुए कुछ यूं कहा- अपना देश सोने की चिड़िया, कभी इसको छोड़ मत जाना, घूमने फिरने पर कोई रोक नहीं, पर अपना असली यही ठिकाना।

डॉ. विनोद शर्मा ने अपनी रचना  फ़रिश्ते के माध्यम से कहा- अस्पताल के बाहर लंगर देखा लगाते,  उसमें लोग ईश्वर का रूप पाते, बिलखते लोगों के आंसू पोंछते देखे, मैंने धरती पर ईश्वर के फरिश्ते देखे। कवयित्री किरण आहूजा ने कहा – इस धरती को प्रणाम मैं करती हूं, पावन गंगा जहां बहती है, कल कल करती पावन धारा,वीरों की गाथा कहती है। बाल कृष्ण गुप्ता ‘सागर’ ने कहा-सी मरघट में शैतान जला, उसी मरघट में विद्वान जला, मिल कर जब दोनों राख हुए, मान अभिमान स्वाभिमान जला। नीलम त्रिखा ने कहा- भारत भूमि पर मिटने वाले नमन मेरा उन दीवानों को, मातृभूमि पर शीश चढ़ाने वाले नमन मेरा उन जवानों को। सतपाल सिंह  ने कहा- नींद बिन बुलाए ही आती थी, भूख भी टूट कर सताती थी। अशोक आर्य ने कहा दुनिया वालों देव दयानन्द दीप जलने आया था। शिक्षिका किरण प्रभा ने भी कविता पेश की। कार्यक्रम पर केके शारदा, प्रेम विज  और डॉ सरिता मेहता विशिष्ट अतिथि बतौर उपस्थित रहे।

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