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योग माहोत्सव का समापन नहीं, नया आगाज है — राज्यपाल गुरमीत सिंह


अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव के समापन पर दिया शांति और अध्यात्म का संदेश

आशीष लखेड़ा/उत्तराखण्ड लाइव|ऋषिकेश

ऋषिकेश में आयोजित अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव के समापन समारोह में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि यह महोत्सव केवल समापन नहीं, बल्कि पूरी मानवता को अध्यात्म और शांति का संदेश देने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि ऋषिकेश की पावन धरती से योग का संदेश पूरे विश्व में गूंज रहा है और भारत “सबका भला, सबका विकास” की भावना के साथ विश्व में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है।

राज्यपाल ने सिख धर्म के निशान की व्याख्या करते हुए कहा कि इसके तीन प्रतीक—संत, विद्वान और सैनिक—समाज के संतुलन और सशक्त निर्माण के आधार हैं। उन्होंने कहा कि शक्ति के बिना शांति संभव नहीं है और हमारी सनातन परंपरा, धरोहर तथा जड़ों से जुड़ी संस्कृति हमें योग और आयुर्वेद के माध्यम से मिली है।

उन्होंने उत्तराखण्ड को ऋषि-मुनियों और तपस्वियों की भूमि बताते हुए कहा कि गंगा की पवित्रता और यहां की औषधीय संपदा इसे विश्व में विशेष स्थान दिलाती है। इस वर्ष महोत्सव में 33 देशों के 250 से अधिक विदेशी योग साधकों और लगभग 2850 भारतीय प्रतिभागियों ने भाग लिया, जहां योग, प्राणायाम, ध्यान, साधना और आयुर्वेद के विभिन्न आयामों की जानकारी दी गई।

इस अवसर पर जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी ने कहा कि भारतीय संस्कृति अध्यात्म से परिपूर्ण है और आज विश्व के अनेक देश योग के माध्यम से इससे जुड़ रहे हैं।

प्रदेश के वन एवं पर्यावरण मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि योग ऊर्जा का स्रोत है और ऋषिकेश आज विश्व को योग की दिशा देने वाला प्रमुख केंद्र बन चुका है।

कार्यक्रम के अंत में प्रबंध निदेशक प्रतीक जैन ने सभी अतिथियों, योगाचार्यों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि महोत्सव को भव्य, दिव्य और नवीन बनाने में जनसहभागिता की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। समारोह में विभिन्न संत-महात्माओं, जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।

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