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चंडीगढ़ बिजनेस काउंसिल के प्रतिनिधिमंडल ने एसडीएम, ईस्ट एवं साउथ से मुलाकात कर व्यापार-अनुकूल चण्डीगढ़ के लिए त्वरित सुधारों की मांग की


चण्डीगढ़ : चण्डीगढ़ बिजनेस काउंसिल (सीबीसी) के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने अध्यक्ष अजय गुप्ता के नेतृत्व में  पवितर सिंह, पीसीएस, एसडीएम (ईस्ट) एवं सहायक एस्टेट अधिकारी-1 तथा सुश्री ईशा कंबोज, एचसीएस, एसडीएम (साउथ), निदेशक, संग्रहालय एवं कला दीर्घा तथा संयुक्त सचिव, स्थानीय सरकार से मुलाकात कर चंडीगढ़ के व्यापारियों, उद्योगपतियों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई), पेशेवरों, नव उद्यमों (स्टार्टअप्स) तथा बाजार एसोसिएशनों से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की।

प्रतिनिधिमंडल में अजय गुप्ता (अध्यक्ष), नीरज बजाज (मुख्य संरक्षक), चंदर वर्मा (मुख्य सलाहकार), सतपाल गर्ग (मुख्य सलाहकार) तथा जगदीश अरोड़ा (अध्यक्ष) शामिल थे।

बैठक के दौरान सीबीसी ने प्रशासन को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा और आग्रह किया कि ऐसे व्यावहारिक सुधार लागू किए जाएं, जिनसे चंडीगढ़ के सुनियोजित स्वरूप को बनाए रखते हुए व्यापार करना और अधिक आसान हो सके।

काउंसिल ने विशेष रूप से जो मुद्दे उठाए उनमें सेक्टर 1 से 30 तक स्थित बॉक्स-प्रकार के वाणिज्यिक भवनों (एससीएफ/एससीओ) के लिए पुराने भवन उपनियमों और व्यापारिक नियमों को वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप आधुनिक बनाए जाने,
भवन नियमों के उल्लंघन पर लगाए जाने वाले अत्यधिक जुर्मानों की समीक्षा किए जाने,  छोटे या तकनीकी उल्लंघनों पर मौजूदा जुर्माने असंगत रूप से अधिक हैं और इनके लिए अधिक तर्कसंगत एवं न्यायसंगत व्यवस्था बनाए जाने,
वाणिज्यिक संपत्तियों के उपयोग और विस्तार से जुड़े कड़े नियमों में राहत दिए जाने, ताकि कारोबारी बदलती बाजार की आवश्यकताओं के अनुसार बिना अनावश्यक प्रक्रियात्मक बाधाओं के अपने व्यवसाय का विस्तार कर सकें,
एससीएफ/एससीओ में सुरक्षित रूपांतरण तथा आंतरिक पुनः डिजाइन की अनुमति दी जाए, ताकि उनकी उपयोगिता बढ़े, ग्राहकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो और व्यावसायिक स्थानों का बेहतर उपयोग हो सके, व्यापार परिवर्तन तथा छोटे-छोटे आंतरिक संशोधनों की स्वीकृति प्रक्रिया को सरल बनाए जाने, ताकि अनावश्यक देरी और अनुपालन संबंधी बोझ कम हो,
सीलिंग नोटिस और प्रवर्तन कार्रवाई में संतुलित दृष्टिकोण अपनाए जाने तथा विशेषकर तकनीकी या गैर-संरचनात्मक कमियों के मामलों में दंडात्मक कार्रवाई के बजाय नियमों के पालन और सुधार को प्राथमिकता दिए जाने संबंधी मांगे व मुद्दे शामिल हैं।

ज्ञापन में औद्योगिक क्षेत्रों के बुनियादी ढांचे, पार्किंग एवं यातायात प्रबंधन, संपत्ति के पंजीकरण और नामांतरण (म्यूटेशन) में हो रही देरी, आपदा प्रबंधन की तैयारियों तथा प्रशासन और व्यापारिक समुदाय के बीच नियमित संस्थागत संवाद की आवश्यकता का भी उल्लेख किया गया।

दोनों अधिकारियों ने सीबीसी के सकारात्मक एवं रचनात्मक सुझावों की सराहना करते हुए प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि उनकी सभी मांगों और सुझावों पर संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर गंभीरता एवं सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाएगा।

अंत में, सीबीसी ने चंडीगढ़ प्रशासन के साथ मिलकर शहर में प्रगतिशील, पारदर्शी एवं व्यापार-अनुकूल वातावरण विकसित करने के अपने संकल्प को दोहराया

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