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पीजीआईएमईआर ने ‘स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग’ थीम के साथ 12वाँ अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया


चंडीगढ़ : पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआईएमईआर), चंडीगढ़ ने 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 का उत्साह एवं सामूहिक सहभागिता के साथ आयोजन किया। इस अवसर पर स्वास्थ्यकर्मियों, संकाय सदस्यों, विद्यार्थियों, कर्मचारियों तथा उनके परिवारों ने योग के माध्यम से स्वास्थ्य एवं कल्याण का संदेश दिया।

 कार्यक्रम में पीजीआईएमईआर के निदेशक प्रो. विवेक लाल, उपनिदेशक (प्रशासन) पंकज राज, डीन (अकादमिक) डॉ. आर.के. राठो, डीन (अनुसंधान) डॉ. संजय जैन तथा वर्ल्ड एनसीडी फेडरेशन के अध्यक्ष डॉ. जे.एस. ठाकुर मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

सीसीआरवाईएन–पीजीआईएमईआर सहयोगी केंद्र (योग केंद्र) द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का आयोजन संस्थान के स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में किया गया, जिसमें साप्ताहिक अवकाश एवं नीट परीक्षा के बावजूद 3,217 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतिभागियों ने कॉमन योग प्रोटोकॉल का सामूहिक अभ्यास कर शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।

कार्यक्रम के सफल संचालन का दायित्व योग केंद्र की योग स्पोक सुश्री ज्योति तिवारी एवं उनकी टीम ने निभाया, जिनका मार्गदर्शन सौरभ कुमार, रिसर्च ऑफिसर, योग केंद्र द्वारा किया गया।

इस वर्ष की थीम “स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग” विशेष रूप से महत्वपूर्ण रही, जिसने बढ़ती आयु के साथ स्वस्थ, सक्रिय एवं आत्मनिर्भर जीवनशैली अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। योग को एक सरल, किफायती एवं वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित जीवनशैली के रूप में प्रस्तुत किया गया, जो शारीरिक शक्ति, लचीलापन, संतुलन, मानसिक दृढ़ता तथा जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने में सहायक है। यह संदेश विशेष रूप से स्वास्थ्यकर्मियों के लिए प्रेरणादायक रहा, जो अपनी व्यस्त दिनचर्या में स्वयं के स्वास्थ्य की उपेक्षा कर बैठते हैं।

इस आयोजन को पीजीआई की विभिन्न एसोसिएशनों, एली लिली, ऑलेंजर्स, मैक्स प्रोटीन तथा वर्ल्ड एनसीडी फेडरेशन का सहयोग प्राप्त हुआ।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। योग केंद्र के प्रभारी प्रो. डॉ. अक्षय आनंद ने सभी अतिथियों, संकाय सदस्यों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों का स्वागत किया। उन्होंने निवारक स्वास्थ्य देखभाल में योग की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए बताया कि नियमित योगाभ्यास कोशिकीय वृद्धावस्था की गति को धीमा करता है, ध्यान के माध्यम से न्यूरोप्लास्टिसिटी एवं संज्ञानात्मक क्षमता को बढ़ाता है तथा विश्राम तकनीकों से स्वायत्त तंत्रिका तंत्र का संतुलन बेहतर बनाता है। उन्होंने यह भी बताया कि पीजीआईएमईआर में योग पर चल रहे शोध उत्साहजनक परिणाम दे रहे हैं तथा सभी प्रतिभागियों को योग केंद्र में प्रतिदिन संचालित 38 योग सत्रों में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया।

इस अवसर पर पीजीआईएमईआर के निदेशक प्रो. विवेक लाल ने अपने संबोधन में कहा,

“योग वह तरीका है जिससे आप सकारात्मक व्यवहार करते हैं।
योग वह तरीका है जिससे आप सकारात्मक सोचते हैं।
योग वह तरीका है जिससे आप सकारात्मक कार्य करते हैं।”

उन्होंने कार्यक्रम में बड़ी संख्या में उपस्थित युवाओं की सराहना करते हुए कहा कि वे भारत की समृद्ध योग परंपरा को आगे बढ़ाने वाले भविष्य के वाहक हैं। उनके प्रेरणादायक संबोधन के पश्चात संस्थान के वरिष्ठ पदाधिकारियों एवं योग अनुसंधान से जुड़े एमडी विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में योग केंद्र के विशेषज्ञों द्वारा संगीत के साथ योग प्रदर्शन एवं अष्टांग योग के सिद्धांतों पर आधारित एक लघु नाटिका प्रस्तुत की गई, जिसने उपस्थित जनसमूह में विशेष उत्साह का संचार किया। इसके उपरांत डॉ. मोनिका गौतम, रिसर्च ऑफिसर, योग केंद्र ने श्री कल्याण माइती, योग थेरेपिस्ट के सहयोग से कॉमन योग प्रोटोकॉल का नेतृत्व किया, जिसमें सभी प्रतिभागियों ने विभिन्न योगासन, प्राणायाम एवं विश्राम तकनीकों का सामूहिक अभ्यास किया।

यह आयोजन पीजीआईएमईआर की समग्र स्वास्थ्य एवं कल्याण को बढ़ावा देने की निरंतर प्रतिबद्धता का प्रतीक रहा। संस्थान नियमित योग कार्यक्रमों एवं जन-जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से स्वास्थ्यकर्मियों एवं आमजन को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने तथा रोगी सेवा के साथ-साथ स्वयं के स्वास्थ्य को भी प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित करता रहेगा।

कार्यक्रम का समापन जलपान एवं प्रतिभागियों के आपसी संवाद के साथ हुआ। सभी प्रतिभागी योग को अपने दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाने के संकल्प के साथ उत्साहपूर्वक लौटे।

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