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“लोभ पापस्य कारणम्” अर्थात लोभ से ही पाप प्रकट होता है : आचार्य ईश्वर चंद्र शास्त्री


चण्डीगढ़ : सेक्टर 28 के खेड़ा शिव मंदिर में शिव महापुराण की कथा सुनाते हुए आचार्य ईश्वर चंद्र शास्त्री ने कहा कि लोभ के कारण व्यक्ति में और भी दुर्गुण आ जाते हैं। एक व्यक्ति, जो लोभ के कारण बहुत अधिक धन चाहता है, वह चोरी, धोखाधड़ी, छल, कपट, झूठ, हिंसा, रिश्वतखोरी जैसे पाप करने पर उतारु हो जाता है। “लोभ पापस्य कारणम्” लोभ के कारण व्यक्ति न केवल अपने लिए बल्कि दूसरों के लिए भी दुख और विनाश का कारण बन सकता है। लोभ से बचने और सत्य के मार्ग पर चलने के लिए, हमें अपनी इच्छाओं को नियंत्रित करना चाहिए और संतोष का अभ्यास करना चाहिए। इसलिए लोभ से बचना और संतोष का अभ्यास करना हमारे लिए महत्वपूर्ण है ताकि हम पापों से बच सकें और एक बेहतर जीवन जी सकें।

 

अत्यधिक लालच व्यक्ति को गलत काम करने के लिए प्रेरित करता है। जब कोई व्यक्ति बहुत अधिक पाने की इच्छा रखता है, तो वह सही-गलत का भेद भूल जाता है और अनैतिक कार्यों में लिप्त हो जाता है। लोभ का अर्थ है किसी भी चीज की अत्यधिक इच्छा रखना, चाहे वह धन, संपत्ति या कोई अन्य वस्तु हो। जब यह इच्छा बहुत अधिक बढ़ जाती है, तो यह व्यक्ति को गलत काम करने के लिए प्रेरित करती है।

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