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बहुगुणा जयंती पर जुटे बुद्धिजीवी, याद किए योगदान


उत्तराखण्ड लाइव | मुनिकीरेती।

मुनिकीरेती में पूर्व मुख्यमंत्री स्व. हेमवती नंदन बहुगुणा की 107वीं जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में उनके राजनीतिक और सामाजिक योगदान को याद किया गया। वक्ताओं ने कहा कि बहुगुणा ने अपने कार्यकाल में पर्वतीय क्षेत्रों के विकास को नई दिशा दी और जनहित को हमेशा प्राथमिकता में रखा।

मुनिकीरेती प्रेस क्लब के तत्वावधान में स्वामीनारायण आश्रम में हुई इस विचार गोष्ठी का शुभारंभ मुख्य अतिथि सुभाष बड़थ्वाल और अन्य अतिथियों—गिरीश डोभाल, संजय शास्त्री, एडवोकेट रमा बल्लभ भट्ट, सूर्यचंद सिंह चौहान व चंद्रवीर पोखरियाल—द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि बहुगुणा की पहचान एक ऐसे जननेता के रूप में रही, जो आम लोगों के बीच रहकर उनकी समस्याओं को समझते और समाधान के लिए काम करते थे। उनकी राजनीतिक दूरदर्शिता और स्पष्ट सोच ने उन्हें अलग पहचान दिलाई।

वरिष्ठ अधिवक्ता रमा बल्लभ भट्ट ने स्व. बहुगुणा के साथ बिताए अपने अनुभवों को साझा करते हुए उनकी दूरदर्शी सोच को याद किया। उन्होंने कहा कि बहुगुणा हर परिस्थिति में संतुलित निर्णय लेने की क्षमता रखते थे और जटिल से जटिल मुद्दों का समाधान सरल तरीके से निकाल लेते थे। साथ ही उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि बहुगुणा का व्यक्तित्व बेहद सरल और जनसरोकारों से जुड़ा हुआ था, जो उन्हें एक सच्चा जननेता बनाता था।

गिरीश डोभाल ने कहा कि वर्तमान भाजपा सरकार भी बहुगुणा के विचारों और उनकी दूरदर्शी सोच का सम्मान करती है। उन्होंने उन्हें एक युगपुरुष बताते हुए कहा कि उनके द्वारा स्थापित सिद्धांत और जनहित के प्रति उनकी प्रतिबद्धता आज भी प्रासंगिक है और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनी रहेगी।

वरिष्ठ पत्रकार सुदीप पंचभैया ने कहा कि यदि आज बहुगुणा जीवित होते, तो उत्तराखंड की राजनीति वर्तमान स्वरूप में नहीं होती। उन्होंने कहा कि बहुगुणा की सोच हमेशा पहाड़ के हित में रही और आज उनके विचारों को पुनः जीवित करने की आवश्यकता है।

संजय शास्त्री ने बहुगुणा की निर्भीकता और निर्णय क्षमता को प्रेरणादायक बताया, जबकि दिनेश व्यास ने उनके जनसेवा के दृष्टिकोण को आज भी प्रासंगिक बताया।

इस दौरान स्वामीनारायण आश्रम के सुनील भगत, रमेश उनियाल, सूर्यचंद सिंह चौहान, भगवती प्रसाद भट्ट, विनोद ध्यानी, संदीप शास्त्री, सुदीप पंचभैया, रीना उनियाल और इंद्र आर्य सहित कई लोगों ने अपने विचार साझा किए।

कार्यक्रम का संचालन रमा बल्लभ भट्ट और रामकृष्ण पोखरियाल ने संयुक्त रूप से किया। इस अवसर पर चंद्रवीर पोखरियाल, शैलेष सेमवाल, सुरेंद्र भंडारी, मीना मदवाण, लीला रमोला, पूजा चंद्रा, लक्ष्मण सिंह भंडारी, सचिन रस्तोगी, मनोज मलासी, शूरवीर सिंह चौहान, घनश्याम नौटियाल, संजय बडोला, भारत भूषण कुकरेती, धनीराम बिंजोला, नवीन चंद्रा, आशीष लखेड़ा, गिरीश भट्ट, आशीष कुकरेती, सीमा बिजल्वाण, दीपा भट्ट, सुनीता नेगी, मधु रावत, प्रदीप बडोला, विशाल मणि पैन्यूली, देवेश उनियाल, स्वाति, अर्चित पांडे, राकेश सेंगर और उर्मिला ममगाईं समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।

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