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ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य बने देवादित्यानंद महाराज।


विद्वत सभा में प्रतिनिधि व शंकराचार्य पद पर नियुक्ति की घोषणा।
आशीष लखेड़ा/ उत्तराखण्ड लाइव/ऋषिकेश 
ऋषिकेश में अखिल भारतीय धर्म संघ और शंकराचार्य स्वामी माधवाश्रम समाधि संस्थानम् से जुड़े विद्वानों व संतों की विद्वत सभा में जगतगुरु देवादित्यानंद महाराज को ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य पद के लिए चुने जाने की घोषणा की गई। इससे पहले उन्हें जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी माधवाश्रम महाराज का प्रतिनिधि भी नियुक्त किया गया।

मंगलवार को शंकराचार्य स्वामी माधवाश्रम समाधि संस्थानम्, शीशम झाड़ी दांडीबाड़ा, मायाकुंड ऋषिकेश में आयोजित बैठक में उत्तराखण्ड के कई विद्वानों और संतों ने भाग लिया। अखिल भारतीय धर्म संघ के उत्तराखण्ड प्रांत अध्यक्ष डॉ. ओमप्रकाश भट्ट की अध्यक्षता में हुई गोष्ठी में स्वामी माधवाश्रम की परंपरा के प्रतिनिधि तथा ज्योतिष पीठ के रिक्त चल रहे शंकराचार्य पद पर सुयोग्य संत के चयन को लेकर विचार-विमर्श किया गया। विद्वत सभा और संतों ने सर्वसम्मति से जगतगुरु देवादित्यानंद महाराज को प्रतिनिधि और ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य पद के लिए नियुक्त करने की घोषणा की।

महंत अभयचैतन्य ने कहा कि उत्तराखण्ड के विद्वानों को ज्योतिष पीठ के लिए योग्य दण्डी स्वामी के चयन का अधिकार है और देवादित्यानंद महाराज इस पद के लिए पूर्णतः योग्य हैं। आचार्य शिव प्रसाद ममगाईं ने कहा कि उनके नेतृत्व में सनातन धर्म के कार्यों को आगे बढ़ाया जाएगा और शीघ्र ही उनका विधिवत अभिषेक किया जाएगा। डॉ. ओमप्रकाश भट्ट ने कहा कि शंकराचार्य माधवाश्रम महाराज ने आजीवन सनातन धर्म के लिए कार्य किया और गौ, गंगा, गायत्री, रोटी, बेटी और चोटी जैसे विषयों पर पूरे देश में जागरूकता फैलाई।

महंत अभयचैतन्य ने बताया कि शंकराचार्य माधवाश्रम के ब्रह्मलीन होने के बाद प्रतिनिधि के लिए कई नाम प्रस्तावित थे, लेकिन परिस्थितियों के कारण नियुक्ति नहीं हो पाई थी। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड के विद्वानों को अधिकार है कि वे ज्योतिष पीठ के लिए किसी सुयोग्य दण्डी स्वामी को शंकराचार्य पद हेतु प्रस्तावित कर सकते हैं। वर्तमान में देवादित्यानंद महाराज तपोनिष्ठ और शास्त्रनिष्ठ जीवन जी रहे हैं, इसलिए उन्हें प्रतिनिधि बनाने का प्रस्ताव रखा गया, जिसे विद्वत सभा ने ध्वनिमत से पारित किया।

विद्वत गोष्ठी का संचालन डॉ. जनार्दन कैरवान ने किया। बैठक में आचार्य शिव प्रसाद ममगाईं, आचार्य तुलसीराम पैन्यूली, वंशीधर पोखरियाल, संजय शास्त्री, केशव स्वरूप ब्रह्मचारी, दण्डी स्वामी विज्ञानानंद तीर्थ, डॉ. ओमप्रकाश पूर्वाल, सुरेन्द्र दत्त भट्ट, कृष्ण प्रसाद उनियाल, विजय जुगलान, नवीन भट्ट, विनायक भट्ट, आचार्य शिव स्वरूप नौटियाल, सर्वात्मानंद गिरि, नागेंद्र पुरी, आचार्य राकेश बहुगुणा, आचार्य राकेश लसियाल, शैलेन्द्र मिश्रा, एल.पी. पुरोहित, आचार्य सुभाष डोभाल, आचार्य जगमोहन मिश्रा, आचार्य शिव प्रसाद सेमवाल, विनोद गैरोला, आचार्य जितेन्द्र भट्ट, रमाबल्लभ भट्ट, घनश्याम नौटियाल, अमित कोठारी, सौरभ सेमवाल, मुकेश थपलियाल, वेदकिशोर सिलसवाल, डॉ. दयाकृष्ण लेखक, आचार्य ललित त्रिपाठी, गंगाराम व्यास, हर्ष मणि पैन्यूली सहित अनेक विद्वान उपस्थित रहे।

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