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स्वतंत्रता दिवस समारोह की पूर्व संध्या पर सैक्टर 22 व 23 में नुक्कड़ नाटक “शहीद की वापसी” का मंचन


चण्डीगढ़ : थियेटर आर्ट्स, चंडीगढ़ के कलाकारों द्वारा चंडीगढ़ संगीत नाटक अकादेमी के सहयोग से स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर घर-घर तिरंगा अभियान के अंतर्गत प्रसिद्ध नाटक शहीद की वापसी का सफलतापूर्वक मंचन सैक्टर 22 और सेक्टर 23 की मार्किटों में किया गया। सी.एस. सिंदरा द्वारा लिखित और राजीव मेहता द्वारा निर्देशित नाटक शहीद की वापसी द्वारा देश के उन महान शहीदों, स्वतंत्रता सेनानियों और बहादुर सैनिकों को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की गई जिन्होंने देश की आजादी और गौरव के लिए अपना पूरा जीवन कुर्बान कर दिया। इस अवसार पर चंडीगढ़ संगीत नाटक अकादेमी की चेयरमेन श्रीमती सुखी बराड़ मुख्य अतिथि के रूप मे उपस्थित थी।

नाटक की शुरुआत हर धर्म के लोगों के साथ होती है, जो शहीद उधम सिंह की प्रतिमा को भावपूर्ण श्रद्धांजलि देने के लिए एकत्रित होते हैं। एक अध्यापक उन्हें महान शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा हमारी मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए दिए गए बलिदान के बारे में बताता है। जब सभी भारतीय एकजुट होने जा रहे होते हैं, तो अंग्रेज जनरल प्रवेश करते हैं और अपनी मीठी जुबान के जादू से अपनी प्रसिद्ध फूट डालो और राज करो की नीति उन पर थोपते हैं। विभिन्न वर्गों के लोग आपस में लड़ने लगते हैं और यहां तक कि बूढ़े स्वंतत्रता सैनानी लाटीभान का अपमान भी करते हैं। अंग्रेज जनरल की इस क्रूरता को देखकर अचानक ऊधम सिंह की प्रतिमा जीवित हो जाती है और विभिन्न संस्कृतियों के लोगों को भगत सिंह, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, वीर सावरकर, राम प्रसाद बिस्मिल, चंद्र शेखर आजाद जैसे युवाओं द्वारा दिए गए बलिदानों के बारे में याद करवाते हैं। लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक, सर हेड ग्रेवार और कई अन्य महान आत्माओं के बारे में भी अवगत कराते हैं, जिन्होंने तिरंगे और मातृभूमि की स्वतंत्रता और गौरव के लिए अपना पूरा जीवन बलिदान कर दिया, ताकि हमारी आने वाली पीढ़ियां आजादी की खुली हवा में स्वतंत्र रूप से रह सकें। तब लोगों को अपनी गलती का एहसास होता है और अचानक क्रोध से अंग्रेज जनरल को मार डाला जाता है। वे यह भी प्रतिज्ञा करते हैं कि वे अपने राष्ट्र और हमारे राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे के गौरव के लिए आवश्यकता पड़ने पर अपना जीवन भी बलिदान कर देंगे। उधम सिंह ने उन्हें यह भी संबोधित किया कि उन्हें हमेशा राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगे) का उचित सम्मान करना चाहिए और हमेशा अपने घरों और कार्यालयों में इसे लहराएं ताकि दुनिया में हर कोई यह जान सके कि हम सभी अपने देश, अपनी मातृभूमि और राष्ट्रीय ध्वज से कितना प्यार करते हैं।
दर्शकों ने नाटक का भरपूर आनंद लिया। नाटक के कलाकारों में योगेश अरोड़ा, राजीव मेहता, रमेश कुमार भारद्वाज, भूपिंदर सिंह संधू, मुकेश चंदेलिया, आशा सकलानी, राहुल वर्मा, संदीप कुमार, रविंदर सिंह रावत, साहिल ग्रोवर, आरव अरोड़ा , दिलप्रीत कौर, जसवंत सिंह तथा हरप्रीत सिंह थे।

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