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हिंदी ने जोड़े दिल, कवियों की रचनाओं पर देर तक गूंजती रही तालियां


कलाग्राम में हिंदी दिवस पर सजी काव्य गोष्ठी, ट्राईसिटी के कवियों ने बांधा समां

चण्डीगढ़ : हिंदी दिवस के अवसर पर सोमवार को कलाग्राम में आयोजित काव्य गोष्ठी में  ट्राईसिटी के नामचीन कवियों ने अपनी रचनाओं से साहित्य प्रेमियों को भावनाओं और विचारों से जोड़ दिया। उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (एनजेडसीसी), पटियाला, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से आयोजित कार्यक्रम में चंडीगढ़, पंचकूला और मोहाली के कवियों ने कविता, गीत और साहित्यिक रचनाओं का पाठ किया। हर प्रस्तुति के बाद सभागार तालियों से गूंजता रहा।

गोष्ठी में प्रसिद्ध कवि शम्स तबरेजी, कवि एवं लेखक राजबीर देसवाल, डॉ. श्याम सखा श्याम, डॉ. अशोक कुमार, अध्यक्ष, हिंदी विभाग, पंजाब विश्वविद्यालय, डॉ. एस.एस. मौदगिल और डॉ. संगीता शर्मा कुंद्रा ‘गीत’ सहित अन्य कवियों ने रचनाएं प्रस्तुत कीं। कविताओं में देशप्रेम, सामाजिक सरोकार, रिश्तों की संवेदनाएं और बदलते समय की तस्वीर देखने को मिली।कविताओं ने कभी गुदगुदाया तो कभी सोचने पर मजबूर किया
कवियों की प्रस्तुतियों के दौरान दर्शकों की प्रतिक्रियाएं भी खास रहीं। कहीं हास्य और व्यंग्य पर ठहाके गूंजे तो कहीं भावपूर्ण पंक्तियों पर श्रोताओं ने तालियों से कवियों का उत्साह बढ़ाया। कई रचनाओं के बाद दर्शकों ने दोबारा सुनाने की मांग भी की। साहित्य प्रेमियों ने कहा कि मोबाइल और डिजिटल दौर में इस तरह की काव्य गोष्ठियां लोगों को साहित्य से सीधे जोड़ने का काम करती हैं।

एनजेडसीसी के निदेशक डॉ. अश्विन एम. दलवी ने कहा कि हिंदी केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि देश की विविध संस्कृतियों और भावनाओं को जोड़ने वाली कड़ी है। उन्होंने कहा, “हिंदी सिर्फ एक भाषा नहीं, बल्कि वह भाव है जो पूरे देश को जोड़ता है।” उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से नई पीढ़ी को हिंदी साहित्य और भारतीय सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का अवसर मिलता है।

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