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40 साल बाद कांग्रेस को रमेश उनियाल ने कहा अलविदा, इस्तीफे से सियासत गरमाई।


ऋषिकेश, 4 अक्टूबर। उत्तराखंड की सियासत में उस वक्त हलचल तेज हो गई, जब पूर्व राज्यमंत्री रमेश उनियाल ने करीब 40 साल पुराने कांग्रेस के रिश्ते को खत्म करते हुए पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और सभी दायित्वों से इस्तीफा दे दिया। उनके इस फैसले से स्थानीय कांग्रेस की राजनीति में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।

रमेश उनियाल ने अपने इस्तीफे के पीछे संगठन में संवाद की गंभीर कमी और मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को वजह बताया है। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि उनका फैसला किसी व्यक्ति विशेष से नाराजगी या मतभेद के कारण नहीं है।

उनियाल ने कहा कि चार दशक तक जिस संगठन के साथ राजनीतिक सफर तय किया, उससे अलग होना आसान नहीं था। लेकिन परिस्थितियों की समीक्षा और अपनी राजनीतिक एवं जनसेवा की प्राथमिकताओं को देखते हुए उन्हें यह कदम उठाना जरूरी लगा।

1985 में शुरू हुआ था राजनीतिक सफर

रमेश उनियाल ने वर्ष 1985 में युवक कांग्रेस से अपना राजनीतिक सफर शुरू किया था। लंबे राजनीतिक करियर के दौरान उन्होंने मुनि की रेती युवक कांग्रेस अध्यक्ष, शहर कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष, जिला कांग्रेस सेवादल अध्यक्ष और टिहरी गढ़वाल जिला कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सहित कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं।

वर्ष 1995 से 2004 तक वह उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड कांग्रेस सेवादल में विभिन्न पदों पर रहे। वहीं फरवरी 2014 से मार्च 2016 तक उन्होंने उच्च शिक्षा विभाग में उपाध्यक्ष, राज्य मंत्री स्तर की जिम्मेदारी भी संभाली।

कांग्रेस छोड़कर भी किसी दल में नहीं जाएंगे

इस्तीफे के बाद उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर भी अटकलें तेज हैं। हालांकि रमेश उनियाल ने फिलहाल इन अटकलों पर विराम लगाते हुए कहा कि वह अभी किसी अन्य राजनीतिक दल में शामिल नहीं होंगे।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में वह सक्षम और योग्य उम्मीदवार का समर्थन करेंगे।

करीब चार दशक तक कांग्रेस के साथ रहे रमेश उनियाल का अचानक पार्टी से अलग होना ऐसे समय में हुआ है, जब उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां धीरे-धीरे तेज हो रही हैं। ऐसे में उनके इस फैसले का आने वाले दिनों में स्थानीय राजनीति पर कितना असर पड़ता है, इस पर सभी की नजरें रहेंगी।

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