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विश्व कराओके दिवस पर दिव्य कराओके सिंगिंग ग्रुप ने सजाई सुरों की महफ़िल


कराओके संगीत प्रणाली के आविष्कारक जापान के प्रसिद्ध संगीतकार दाइसुके इनोए को भी याद किया

चण्डीगढ़ : दिव्य कराओके सिंगिंग ग्रुप द्वारा विश्व कराओके दिवस के अवसर पर “आओ झूमें गाएं” शीर्षक से एक भव्य संगीतमय संध्या का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में संगीत प्रेमियों और कराओके गायकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा सदाबहार फिल्मी गीतों का आनंद लिया।इस अवसर पर क्विज़ मास्टर किशोर कुमार शर्मा तथा यादगार-ए-रफ़ी सोसायटी के बी. डी. शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। अपने संबोधन में किशोर कुमार शर्मा ने कराओके के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए बताया कि कराओके संगीत प्रणाली का आविष्कार जापान के प्रसिद्ध संगीतकार दाइसुके इनोए ने किया था, जिन्हें प्रेमपूर्वक “फादर ऑफ कराओके” कहा जाता है। उन्होंने बताया कि इनोए एक बैंड लीडर, ड्रमर और कीबोर्ड वादक भी थे।


कार्यक्रम का एक विशेष आकर्षण कारगिल युद्ध के शहीदों को समर्पित एक पोस्टर का विमोचन रहा। उपस्थित सभी लोगों ने शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके सर्वोच्च बलिदान को नमन किया।
संगीतमय संध्या के दौरान बी. डी. शर्मा ने सदाबहार गीत “हसीन हो तुम, खुदा नहीं हो” प्रस्तुत कर खूब वाहवाही बटोरी, जबकि किशोर कुमार शर्मा ने “आ जा रे आ ज़रा” गीत सुनाकर समां बांध दिया। वहीं बिंदुसार ने “काली घटा छाए, प्रेम ऋतु आए” गीत प्रस्तुत कर श्रोताओं का भरपूर मनोरंजन किया।
कार्यक्रम में 30 से अधिक गायकों ने अपनी मधुर प्रस्तुतियों से शाम को यादगार बना दिया। इनमें लिली गुप्ता, विवेक एवं मधु शर्मा, निर्मल नूर, दीपक भटनागर, नरेश कोहली, कुलदीप सिंह, मधुबाला शर्मा, सुजाता शर्मा, आर. एन. गुप्ता, सुखपाल सिंह, विक्रमजीत ग्रोवर, मोना शर्मा, पवन शर्मा, सुनील अंजोरिया, मनिंदर पाल सिंह, अनामिका, राजेश कंवर, रजनीश चोपड़ा, मीना भट्ट, सुषमा रावल एवं विशाल मोनी, पियूष शर्मा, डॉ. गुरप्रताप सिंह, सी. पी. पुरी, कवीश कुमार, जयदीप सिंह, सुरिंदर कक्कड़, नीना शर्मा, हरजीत रिखरा, एस. के. अवस्थी, रमेश अनेजा, जे. के. भारद्वाज, इंजीनियर तरसेम राज तथा गणेश कुमार शामिल रहे। सभी कलाकारों की प्रस्तुतियों को दर्शकों ने खूब सराहा।
कार्यक्रम का समापन देशभक्ति और संगीत के रंग में हुआ। आयोजकों ने कहा कि ऐसे आयोजन न केवल संगीत प्रेमियों को एक मंच प्रदान करते हैं, बल्कि आपसी भाईचारे, सांस्कृतिक सौहार्द और कला के प्रति प्रेम को भी बढ़ावा देते हैं।

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