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भ्रष्ट सरकार के लिए आम जन है जिम्मेदार।


शिवानी कोटियाल/उत्तराखण्ड लाइव: यदि आप सोचते हैं कि देश में मौजूद राजनीतिक पार्टियां या नेतागण ही गलत या भ्रष्ट हैं तो मुझे लगता है कि यह एक अधूरा सच होगा। क्योंकि ​यदि वे गलत हैं या भ्रष्ट हैं तो जाहिर सी बात है उन्हें यह सत्ता या देश की बागडोर सौंपने वाले हम भी उतने ही भ्रष्ट और गलत हैं। क्योेकि सरकार को बहुमत के साथ आपने जिताया है। बिना आपके बहुमत के कोई भी पार्टी सरकार नहीं बना सकती। लिहाजा इसके लिए आप और हम स्वयं ही जिम्मेदार हैं। तो जब पार्टी को बहुमत से जिताने वाले आप हैं, उसे सरकार बनाने का मौका देने वाले आप हैं। तो फिर उस सरकार में आज आपको यूं अचानक दोष क्यों नजर आने लगा ? आखिर जनता को उस सरकार से इतनी असंतुष्टि क्यों ?

भ्रष्ट सरकार को चुनने में जनता कैसे जिम्मेदार ?

आम तौर पर देखा गया है कि चुनाव के समय पार्टियां सीधे तौर पर वोट मांगने के लिए जनता से संपर्क करती है। ऐसे में जनता भी अपने वर्तमान लाभ के लालच में अपना कीमती मत उस पार्टी के उम्मीदवार को दे देती है। उम्मीदवार के गंदे चरित्र और सामाजिक गंदी छवि के बावजूद जनता अपने थोड़े समय के सुख के लिए आने वाले पांच सालों को लालच के भेंट चढ़ा जाती है। बिना यह सोचे समझे कि हम जिसे मत दे रहे है वो कल जनता कि जरूरतों को पूरा कर सकेगा या नहीं उनकी समस्याओं का समाधान कर पाएगा या नहीं। हम अपने आज कि सुविधा के लिए अपने आने वाले ५ साल किसी गलत् हाथों मे दे देते है।

आखिर क्या है इसका निवारण ?
सबसे पहले तो अगले चुनाव में अपना मत किसी को खरीदने न दें। प्रत्याशी आपकी उम्मीदों पर खरा उतरता है या नहीं यह सुनिश्चित कर लें। एक पढ़े लिखे, जानकार और ईमानदार व्यक्ति के पक्ष में ही अपना मतदान करें। इसके अलावा एक जागरूक जनता होने के नाते अपने गांव,नगर या शहर में होने वाले विकास पर नजर रखिए।

यदि कहीं पर गलत नजर आता है तो संबंधित अधिकारी से शिकायत करें। सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं के बारे में जानकारी रखें और समय-समय पर अधिकारियों से उसके बारे में जानकारी लेते रहे। यदि आप गांव में हैं तो अपने क्षेत्र के ग्राम प्रधान से योजनाओं के बारे में पूछें कि कितनी धनराशि गांव के किस विकास के लिए सरकार द्वारा आवंटित की गई है और उसका ब्योरा भी प्राप्त करें यह सब हिसाब आपको प्राप्त करना चाहिए।

ग्राम सभा अपने आप में लोकल स्तर पर एक तरह की संसद व सरकार का प्रारूप है। जहाँ आप अपने गांव के विकास से सबंधित कोई भी जानकारी प्राप्त करने के पूरी तरह अधिकारी हैं। यह अधिकार आपको भारत के लोकतंत्र होने पर प्राप्त है।

आरटीआई : सूचना का अधिकार अधिनियम भारत की संसद द्वारा पारित एक कानून है, जो 12 अक्टूबर, 2005 को लागू हुआ. यह कानून नागरिक को जानने का अधिकार(Right To Information) या सूचना लेने के अधिकार(RTI) का हक देता है. हर नागरिक को सूचना लेने का अधिकार(Right To Information) है।

यह सुनने मे अच्छा लग रहा है ना ? लेकिन यह ऐसा होता भी अगर हम अच्छे प्रतिनिधि को चुनकर् भेजते लेकिन दुर्भाग्यवश हम लालच् मे आकर गलत इंसान को भेजते है जिसे पता भी नई होता उसको चुना क्यूँ गया है ? क्या उसके कार्य है ?  यह सब तब होता है जब हम और आप अपने मत की कीमत को नहीं समझते। लोकतंत्र में  जनता को प्रश्न पूछने का आधिकार् है गलत के खिलाफ आवाज़ उठाने का अधिकार है, इसलिये आप सब से विनती है कि एक जागरूक नागरिक बने।

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